बिटकॉइन ‘घोटाले’ में राज कुंद्रा के खिलाफ कार्यवाही आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त सबूत : अदालत

बिटकॉइन ‘घोटाले’ में राज कुंद्रा के खिलाफ कार्यवाही आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त सबूत : अदालत

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  • Publish Date - January 7, 2026 / 09:28 PM IST,
    Updated On - January 7, 2026 / 09:28 PM IST

मुंबई, सात जनवरी (भाषा) मुंबई की एक विशेष अदालत ने कथित बिटकॉइन घोटाले के मामले में व्यवसायी राज कुंद्रा को समन जारी करते हुए कहा कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दंडनीय अपराधों के लिए उनके खिलाफ कार्यवाही करने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।

पीएमएलए मामलों के विशेष न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर बी रोटे ने सोमवार को कुंद्रा और दुबई स्थित व्यवसायी राजेश सतीजा को समन जारी करके 19 जनवरी को पेश होने को कहा।

पिछले साल सितंबर में संघीय जांच एजेंसी द्वारा दायर पूरक आरोप पत्र में इन दोनों को आरोपी बनाया गया था।

बुधवार को उपलब्ध कराए गए अपने तर्कपूर्ण आदेश में अदालत ने कहा कि गवाहों के बयान, अभियोजन पक्ष की शिकायत (आरोप पत्र) और मामले के रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया यह सिद्ध होता है कि कुंद्रा और सतीजा पीएमएलए के तहत दंडनीय अपराधों में संलिप्त थे।

अदालत ने कहा, ‘‘आरोपी संख्या 17 और 18 (कुंद्रा और सतीजा) के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं… ईडी ने संज्ञान लेने और उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू करने के लिए प्रथम दृष्टया मामला बनता पाया है।’’

एजेंसी ने आरोप लगाया कि कुंद्रा ने ‘गेन बिटकॉइन पोंजी’ घोटाले’ के मुख्य साजिशकर्ता और प्रवर्तक अमित भारद्वाज से यूक्रेन में ‘बिटकॉइन माइनिंग फार्म’ स्थापित करने के लिए 285 बिटकॉइन प्राप्त किए थे।

ईडी का दावा है कि चूंकि यह सौदा पूरा नहीं हुआ, इसलिए कुंद्रा के पास अब भी 285 बिटकॉइन हैं जिनकी वर्तमान कीमत 150 करोड़ रुपये से अधिक है।

आरोपपत्र में कहा गया है कि कुंद्रा ने उक्त लेनदेन में मध्यस्थ की भूमिका निभाने का दावा किया है, लेकिन इसे साबित करने के लिए कोई दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किया है।

इसके विपरीत, इसमें कहा गया है कि उनके और महेंद्र भारद्वाज के बीच ‘टर्म शीट” नामक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।

आरोपपत्र में कहा गया है, ‘‘इस प्रकार यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि समझौता वास्तव में राज कुंद्रा और अमित भारद्वाज (उनके पिता महेंद्र भारद्वाज) के बीच हुआ था और कुंद्रा द्वारा दिया गया यह तर्क कि उन्होंने केवल मध्यस्थ के रूप में काम किया, मान्य नहीं है।’’

जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि 2018 से कई अवसरों के बावजूद, कुंद्रा लगातार उन ‘वॉलेट एड्रेस’ (एक तरह का डिजिटल पता) को उपलब्ध कराने में विफल रहे हैं जहां 285 बिटकॉइन स्थानांतरित किए गए थे।

उन्होंने जानकारी न मिलने का कारण अपने आईफोन-10 के खराब हो जाने को बताया, लेकिन प्रवर्तन निदेशालय ने इसे सबूत नष्ट करने और अपराध से अर्जित धन को छिपाने की जानबूझकर की गई कोशिश माना है।

भाषा संतोष रंजन

रंजन