मुंबई की पूर्व महापौर ने स्कूलों में ‘मनाचे श्लोक’ का पाठ अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा

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मुंबई की पूर्व महापौर ने स्कूलों में ‘मनाचे श्लोक’ का पाठ अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा

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  • Publish Date - April 3, 2026 / 06:20 PM IST,
    Updated On - April 3, 2026 / 06:20 PM IST

मुंबई, तीन अप्रैल (भाषा) शिवसेना (उबाठा) की पार्षद और पूर्व महापौर किशोरी पेडनेकर ने बृह्नमुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) में एक प्रस्ताव रखा है, जिसमें शहर के सभी निगम विद्यालयों और निजी-सहायता प्राप्त स्कूलों में स्वामी समर्थ रामदास के लिखे ‘मनाचे श्लोक’ का पाठ अनिवार्य करने की मांग की गई है।

हालांकि, पेडनेकर के प्रस्ताव की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने कड़ी आलोचना करते हुए धर्मनिरपेक्ष निगम स्कूलों में आध्यात्मिक साहित्य थोपने का विरोध किया और इसके बजाय संविधान पढ़ाने का सुझाव दिया है।

बीएमसी में विपक्ष की नेता ने 23 मार्च को एक प्रस्ताव रखा, जिसमें 17वीं सदी के संत के श्लोकों का पाठ उन सभी निगम और निजी स्कूलों में अनिवार्य करने की मांग की गई, जहां मराठी एक अनिवार्य विषय है।

प्रस्ताव में कहा गया है कि आसान भाषा में लिखे गये ‘मनाचे श्लोक’ का मकसद छात्रों में अनुशासन, नैतिक मूल्यों और मस्तिष्क विकास को बढ़ावा देना है।

पूर्व महापौर ने बीएमसी प्रशासन से स्कूलों में रोजाना श्लोक पाठ के लिए एक कक्षा या समय तय करने तथा मुंबई के सभी निजी स्कूलों में भी यह निर्देश लागू करने के लिए राज्य सरकार से बात करने की अपील की।

भाषा

शफीक माधव

माधव