(फाइल फोटो के साथ)
मुंबई, 16 मार्च (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अवैध धर्मांतरण के खिलाफ लाए गए विधेयक का सोमवार को बचाव करते हुए कहा कि ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसमें महिलाओं को प्रेम संबंधों के जाल में फंसाया गया, उनसे शादी की गई और बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि धोखाधड़ी से होने वाले धर्मांतरण के खिलाफ लाए जा रहे विधेयक का उद्देश्य इन मुद्दों का समाधान करना और ऐसी प्रथाओं पर अंकुश लगाना है।
फडणवीस ने मंत्रालय (सचिवालय) में पत्रकारों से कहा कि विपक्षी दल वोट बैंक के लिए इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहे हैं, लेकिन एक बार जब वे विधेयक को ध्यान से पढ़ेंगे, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी।
उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र ऐसा कानून लाने वाला पहला राज्य नहीं है और कई राज्यों ने पहले ही गैरकानूनी धर्मांतरण पर अंकुश लगाने के लिए इसी तरह के कानून बनाए हैं।
यदि यह कानून बन जाता है, तो महाराष्ट्र उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश, कर्नाटक और उत्तराखंड जैसे राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा, जिन्होंने धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए इसी तरह के कानून बनाए हैं।
राज्य सरकार ने शुक्रवार को विधानसभा में महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता विधेयक 2026 पेश किया, जिसमें दबाव, धोखाधड़ी, प्रलोभन या विवाह के माध्यम से कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं।
इस विधेयक के अनुसार, विवाह के बहाने गैरकानूनी रूप से धर्म परिवर्तन कराने वालों को सात साल की कैद की सजा दी जाएगी और उन पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
विधेयक में नाबालिग, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति, महिला या अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति के संबंध में उल्लंघन होने पर सात वर्ष तक के कारावास और पांच लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।
फडणवीस ने कहा, ‘‘ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें महिलाओं को बहलाया-फुसलाया गया, वे भाग गईं और शादी के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। ऐसी स्थिति में, ऐसे रिश्तों से पैदा हुए उनके बच्चे का भविष्य अनिश्चित हो जाता है। इससे उनका जीवन जटिल हो जाता है। यह विधेयक ऐसी समस्याओं का समाधान खोजने का प्रयास कर रहा है।’’
उन्होंने कहा कि अगर विपक्षी दलों ने विधेयक को ध्यान से पढ़ा होता, तो उन्हें पता चलता कि यह किसी विशेष समुदाय को निशाना नहीं बनाता, बल्कि इसका उद्देश्य प्रलोभन, जबर्दस्ती या दबाव के माध्यम से किए जाने वाले धर्मांतरण को रोकना है।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘विपक्ष केवल अपने वोट बैंक की राजनीति के लिए इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रहा है। मैं आपको गांरटी देता हूं कि विधेयक को ध्यान से पढ़ने के बाद विपक्ष इस पर आपत्ति नहीं करेगा।’’
प्रस्तावित कानून के तहत, जो व्यक्ति एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तित होना चाहता है तथा जो व्यक्ति या संस्था धर्मांतरण समारोह का आयोजन कर रहा है, उन्हें सक्षम प्राधिकारी को कम से कम 60 दिन पहले सूचना देनी होगी। सक्षम प्राधिकारी जिलाधिकारी या राज्य सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी होगा।
सक्षम प्राधिकारी प्रस्तावित धर्मांतरण का विवरण अपने कार्यालय और संबंधित ग्राम पंचायत या स्थानीय प्राधिकरण में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करेगा और जनता से 30 दिनों के भीतर आपत्तियां आमंत्रित करेगा।
इस विधेयक में यह भी अनिवार्य किया गया है कि धर्मांतरित व्यक्ति और धर्मांतरण समारोह आयोजित करने वाले व्यक्ति या संस्था को धर्मांतरण के 21 दिनों के भीतर प्राधिकार को एक घोषणा पत्र प्रस्तुत करना होगा।
भाषा
राजकुमार दिलीप
दिलीप