नवी मुंबई में ध्वस्तीकरण को रोकने के लिए ‘फर्जी’ न्यायिक आदेश का इस्तेमाल, प्राथमिकी दर्ज

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नवी मुंबई में ध्वस्तीकरण को रोकने के लिए ‘फर्जी’ न्यायिक आदेश का इस्तेमाल, प्राथमिकी दर्ज

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  • Publish Date - June 24, 2026 / 06:48 PM IST,
    Updated On - June 24, 2026 / 06:48 PM IST

ठाणे, 24 जून (भाषा) नवी मुंबई में नगर आयुक्त के मोबाइल फोन पर अदालत के ‘फर्जी’ आदेश की प्रति भेजकर एक अवैध बहुमंजिला इमारत की ध्वस्तीकरण की कार्रवाई रुकवाने का मामला सामने आया है। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी।

पुलिस ने बताया कि अदालती आदेश में जालसाज़ी और प्रशासनिक धोखाधड़ी का यह चौंकाने वाला मामला इस महीने की शुरुआत में सामने आया और स्थानीय अदालत के निर्देश पर 20 जून को नवी मुंबई में प्राथमिकी दर्ज की गई।

नवी मुंबई के सरसोले इलाके में स्थित इमारत को ध्वस्त करने की कार्रवाई नवी मुंबई महानगरपालिका (एनएमएमसी) ने इस साल मई में शुरू की थी।

नवी मुंबई पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘नगर निकाय की कार्रवाई को रोकने के लिए, अदालत का स्थगन आदेश एनएमएमसी आयुक्त के मोबाइल फोन पर भेजा गया। उस कानूनी दस्तावेज़ पर भरोसा करते हुए, नगर प्रशासन ने तुरंत तोड़-फोड़ की कार्रवाई रोक दी। हालांकि, बाद में हुई जांच-पड़ताल में सामने आया कि उक्त स्थगन आदेश फर्जी था, जिसे नगर निकाय को गुमराह करने के लिए तैयार किया गया था।’’

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मामले में तब एक सनसनीखेज मोड़ आया जब जांचकर्ताओं ने उस मोबाइल नंबर का पता लगाया जिससे एनएमएमसी आयुक्त को फर्जी स्थगन आदेश की प्रति भेजी गई थी और पाया कि वह नंबर एक स्थानीय नेता का था।

नवी मुंबई के बेलापुर की एक अदालत ने न्यायपालिका के नाम के दुरुपयोग पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए, मामले में संलिप्त लोगों के खिलाफ तुरंत प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया।

सूत्रों के बताया कि अदालत के आदेश पर पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।

भाषा धीरज प्रशांत

प्रशांत