मुंबई, 18 सितंबर (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने एक महीने की पोती की हत्या के आरोपी व्यक्ति को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा है कि परिवार एक और बेटी नहीं चाहता था तथा यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजादी के करीब 80 साल बाद भी लोग बेटे को प्राथमिकता देते हैं।
उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के न्यायाधीश एम. एम. नेर्लिकर ने नौ सितंबर के आदेश में आरोपी गोपीनाथ जानकू प्रधान की जमानत याचिका खारिज कर दी।
प्रधान के खिलाफ 2023 में महाराष्ट्र के पूर्वी हिस्से के गढ़चिरौली जिले में पुलिस ने हत्या और साक्ष्य नष्ट करने के आरोप में मामला दर्ज किया था। पुलिस के अनुसार, प्रधान ने बेटे और बहू की एक माह की बच्ची को टब में डुबोकर मार दिया, क्योंकि परिवार एक और बेटी नहीं चाहता था।
आरोपी ने अपनी जमानत याचिका में खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि इस मामले में सह-आरोपी बच्ची की मां को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
न्यायमूर्ति नेर्लिकर की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि यह ‘‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’’ है कि आजादी के 80 साल बाद भी हमारे देश में लोग अब भी बेटे को प्राथमिकता देते हैं। पीठ ने कहा कि बच्ची की हत्या इसलिए कर दी गई, क्योंकि परिवार एक और बेटी नहीं चाहता था।
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘इस मामले में आरोपी परिवार के सभी सदस्यों ने यह शोर मचाया कि किसी ने बच्ची की हत्या कर दी और ऐसा माहौल बनाया कि शायद कोई जानवर उसे उठा ले गया हो।’’ अदालत ने कहा कि बच्ची का अंतिम संस्कार भी जल्दबाजी में कर दिया गया।
एक स्थानीय निवासी ने संदेह के आधार पर घटना की जानकारी पुलिस को दी, जिसके बाद मामला दर्ज किया गया। इसके बाद बच्ची के शव को कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम कराया गया, जिसमें मौत का कारण डूबने से दम घुटना बताया गया।
प्रधान को जमानत देने से इनकार करते हुए अदालत ने कहा कि आरोपी का आचरण और जिस तरीके से अपराध को अंजाम दिया गया, उसे देखते हुए उसे कोई राहत नहीं दी जा सकती।
भाषा आशीष सुरेश
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