मुंबई, 18 फरवरी (भाषा) शिवसेना (उबाठा) ने बुधवार को कहा कि विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इनक्लूसिव अलायंस) में नेतृत्व परिवर्तन का मुद्दा फिर से उठ खड़ा हुआ है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उबाठा ने प्रत्यक्ष तौर पर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि गठबंधन का नेतृत्व कौन करेगा, इस मुद्दे पर ध्यान देना होगा।
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने असंतुष्ट कांग्रेस सदस्यों और संप्रग से जुड़े लोगों की राय का हवाला दिया, जिन्होंने सुझाव दिया था कि विपक्षी गुट ‘इंडिया’ का नेतृत्व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन को सौंप दिया जाना चाहिए।
शिवसेना (उबाठा) के मुखपत्र ‘सामना’ में एक संपादकीय में कहा गया, ‘‘ यह फैसला ममता, स्टालिन या किसी और के बारे में लिया जाना चाहिए।’’
संपादकीय में कहा गया कि चुनाव की घोषणा होने पर जागने और विपक्षी गठबंधन पर चर्चा करने के बजाय यह जरूरी है कि सहयोगियों के बीच विचार-विमर्श हो और सोच-समझकर निर्णय लिया जाए।
कांग्रेस, विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ का नेतृत्व कर रही है, जो 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन का मुकाबला करने के लिए बनाया गया था।
‘सामना’ के संपादकीय में यह प्रश्न उठाया गया, ‘‘ विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के नेतृत्व में बदलाव का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। लोकसभा चुनाव के बाद ‘इंडिया’ गुट का क्या हुआ? यह सवाल कई लोगों के मन में है। लेकिन क्या कांग्रेस के मन में भी यह सवाल आया है?’’
संपादकीय में कहा गया कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस तृणमूल कांग्रेस (ममता बनर्जी नीत पार्टी) के खिलाफ चुनाव लड़ रही है। केरल में कांग्रेस वामपंथी दलों के खिलाफ है। महाराष्ट्र में कांग्रेस ने हाल ही में हुए नगर निकाय चुनावों में स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का विकल्प चुना, जिससे भाजपा को फायदा हुआ।
इसमें कहा गया, ‘‘ यह सवाल जितना राजनीतिक चर्चा से जुड़ा है, उतना ही राष्ट्र से भी। जब भी चुनाव की घोषणा होगी, ‘इंडिया’ गुट जाग उठेगा और बातचीत करेगा। लेकिन साथ बैठकर सोच-समझकर फैसला लेना ज्यादा समझदारी भरा कदम होगा।’’
संपादकीय में कहा गया, ‘‘ यह फैसला ममता, स्टालिन या किसी और के बारे में लेना होगा।’’
इसमें कहा गया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने यह सकारात्मक रुख अपनाया है कि उन्हें इस बात की परवाह नहीं है कि उन्हें ‘‘संसद से निकाल दिया जाएगा’’ या सरकार उन पर मामले थोपेगी। यह उनकी जुझारू भावना को दर्शाता है। लेकिन अगर कार्यकर्ता सत्ता से दूर रहते हैं तो वे सुस्त हो जाते हैं और सत्ता में आने की भूख खो देते हैं।
शिवसेना (उबाठा) ने दावा किया कि भले ही भाजपा को बहुमत न मिला हो (2024 के लोकसभा चुनाव परिणामों का जिक्र करते हुए) और केंद्र में उसकी सरकार किसी तरह चल रही हो, फिर भी उसका ‘अहंकार’ खत्म नहीं हुआ है।
यह पहली बार नहीं है जब शिवसेना (उबाठा) ने कांग्रेस के प्रति निराशा व्यक्त की है।
पिछले महीने एक साक्षात्कार में पीटीआई-भाषा द्वारा यह पूछे जाने क्या ‘इंडिया’ गठबंधन अस्तित्व में है, ठाकरे ने कहा, ‘‘जरा पड़ताल कीजिए और देखिए कि ‘इंडिया’ गठबंधन है या नहीं। यह सही है कि चुनाव के बाद हम केवल एक बार राहुल जी (गांधी) के निवास पर मिले थे।’’
भाषा शोभना मनीषा
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