मुंबई, नौ मार्च (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने सोमवार को एक पिता के इस दावे को ‘‘बेहद मनगढ़ंत’’ बताया कि उसकी नाबालिग बेटी ने उस पर बलात्कार का आरोप केवल गुस्से में आकर लगाया था।
न्यायमूर्ति मनीष पिताले और न्यायमूर्ति श्रीराम शिरसात की खंडपीठ ने व्यक्ति की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखते हुए उसकी अपील खारिज कर दी।
संबंधित व्यक्ति ने याचिका में मार्च 2020 के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उसे कई मौकों पर अपनी नाबालिग बेटी के साथ बलात्कार करने संबंधी मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
व्यक्ति ने अपनी याचिका में तर्क दिया कि उसकी बेटी ने उसे इसलिए फंसाया क्योंकि उसने उसे पढ़ाई बीच में ही छोड़ने के लिए मजबूर किया था, जिसे उसने माता-पिता द्वारा उठाए गए अनुशासनात्मक कदम के रूप में पेश किया, जिससे उसकी बेटी के मन में नाराजगी पैदा हुई।
मामले में एक विशेष अदालत ने व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
वर्ष 2018 में, मुंबई में अपने स्कूल में ‘पुलिस दीदी’ जागरूकता कार्यक्रम के दौरान एक परामर्शदाता से बातचीत करते हुए नाबालिग लड़की ने आरोप लगाया था कि उसका पिता वर्षों से उसका यौन शोषण कर रहा है। लड़की उस समय कक्षा 10 की छात्रा थी।
उच्च न्यायालय ने कहा कि यह मानना मुश्किल है कि केवल इसी कारण से लड़की ने अपने पिता के खिलाफ इतना गंभीर आरोप लगाया।
इसने आरोपी की अपील खारिज करते हुए कहा कि पीड़िता का बयान विश्वास करने योग्य है।
भाषा नेत्रपाल अविनाश
अविनाश