नागपुर, 30 अप्रैल (भाषा) महाराष्ट्र के नागपुर में उस पत्र के बाद उच्च सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया है, जिसमें दावा किया गया है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) मुख्यालय और भाजपा कार्यालय सहित कई प्रमुख स्थानों पर रेडियोधर्मी पदार्थ रखे गए हैं। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
पुलिस ने बताया कि यह पत्र 27 अप्रैल को पुलिस आयुक्त डॉ. रविंदर सिंघल के कार्यालय में प्राप्त हुआ था।
पुलिस ने कई टीम गठित की हैं और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) तथा ऊर्जा विशेषज्ञों को भी इसमें शामिल किया है।
पुलिस ने पत्र में उल्लिखित स्थानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया, लेकिन अभी तक रेडियोधर्मी पदार्थ का कोई सुराग नहीं मिला है।
पुलिस को संदेह है कि पत्र में किया गया दावा फर्जी हो सकता है और इसकी जांच जारी है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, अंग्रेजी में लिखे गए और कथित तौर पर ‘डीएसएस’ नामक एक संगठन द्वारा भेजे गए इस पत्र में आपत्तिजनक टिप्पणियां थीं और धमकी दी गई थी कि शहर में कई स्थानों पर अत्यधिक रेडियोधर्मी पदार्थ ‘सीजियम-137’ को रखा गया है।
पत्र में विशेष रूप से आरएसएस मुख्यालय, स्मृति मंदिर (आरएसएस के संस्थापक डॉ. के.बी. हेडगेवार और संगठन के दूसरे प्रमुख एम.एस. गोलवलकर को समर्पित एक स्मारक) और गणेशपेठ स्थित भाजपा कार्यालय का उल्लेख किया गया था।
इसमें यह भी कहा गया है कि ‘ऑरेंज’ और ‘एक्वा’ लाइन पर चलने वाली मेट्रो ट्रेन और इन इलाकों के पास चलने वाली ‘आपली बस’ सेवाओं की सीटों के नीचे रेडियोधर्मी पदार्थ रखा गया है।
पत्र में यह भी दावा किया गया है कि यह पदार्थ एक कैंसर अस्पताल से प्राप्त किया गया था और पूरे शहर में विकिरण के खतरे की चेतावनी दी गई है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘पत्र मिलते ही हमने तुरंत सभी आपातकालीन प्रोटोकॉल सक्रिय किए। कई टीम तैनात की गई हैं और उल्लेखित सभी संवेदनशील स्थानों की गहन जांच की गई है।’’
उन्होंने बताया कि आतंकवाद-रोधी दस्ते (एटीएस), एनडीआरएफ और परमाणु ऊर्जा विशेषज्ञों ने चिह्नित स्थानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया।
एटीएस के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘अभी तक रेडियोधर्मी पदार्थ का कोई निशान नहीं मिला है। प्रथम दृष्टया यह एक अफवाह प्रतीत होती है, लेकिन हम इसकी पूरी गंभीरता से जांच कर रहे हैं।’’
पत्र मिलने के बाद, एटीएस द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर सदर पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया है।
भाषा शफीक संतोष
संतोष