(कोमल पंचमटिया)
मुंबई, छह जनवरी (भाषा) अभिनेत्री जूही बब्बर का कहना है कि उन्हें अमृता प्रीतम के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित 2003 की फिल्म ‘पिंजर’ में मुख्य भूमिका की पेशकश की गई थी, लेकिन अंत में उन्हें बदल दिया गया क्योंकि निर्माता एक ‘बड़ी’ अभिनेत्री को कास्ट करने के इच्छुक थे।
चंद्रप्रकाश द्विवेदी द्वारा निर्देशित यह फिल्म भारत के विभाजन के दौरान हिंदुओं और मुसलमानों द्वारा झेले गए संघर्षों पर आधारित है। इस फिल्म में उर्मिला मातोंडकर ने पुरो की मुख्य भूमिका निभाई है और उनके साथ मनोज बाजपेयी व संजय सूरी भी हैं।
जूही ने ‘पीटीआई भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में बताया, ‘एक फिल्म थी जिसका नाम ‘पिंजर’ था, उसमें उर्मिला मातोंडकर ने जो भूमिका निभायी है वह मुझे निभानी थी। मैं इसके लिए डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी को दोष नहीं दूंगी। वह मेरे काम की सराहना करते हैं। उस समय उनका करियर शुरू ही हुआ था और उन्होंने कहा था, ‘जब भी मैं ‘पिंजर’ बनाऊंगा, तुम उसमें अभिनय करोगी’, लेकिन फिर एक बड़े निर्माता इस प्रोजेक्ट से जुड़ गए और उन्हें एक बड़े कलाकार की जरूरत थी।’
इसके बाद निर्देशक ने उन्हें लाजो का किरदार निभाने का प्रस्ताव दिया, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। अंततः यह भूमिका ‘तुम बिन’ फिल्म की मशहूर अभिनेत्री संदली सिन्हा ने निभाई।
जूही ने बताया, ‘मैंने डॉक्टर साहब (डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी) से कहा था कि मैं यह नहीं कर पाऊंगी क्योंकि मेरा दिल पुरो (मुख्य भूमिका) में लगा हुआ था और मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं दे पाऊंगी। मैं एक साल से पुरो के किरदार के बारे में सोच रही थी, उपन्यास भी पढ़ चुकी थी, लेकिन फिर भी ऐसा नहीं हुआ। तो, जो होना होता है, वही होता है। उस समय मैं बहुत छोटी थी। शुक्र है, मैंने कुछ सही फैसले लिए।’
अभिनेत्री ने कहा कि उनके और द्विवेदी के बीच अभी भी सौहार्दपूर्ण संबंध हैं और निर्देशक ने ‘द ग्रेट शम्सुद्दीन फैमिली’ में उनके काम की प्रशंसा की।
अभिनेत्री ने बताया कि उन्हें 2002 में आई फिल्म ‘शरारत’ में अभिषेक बच्चन के साथ काम करने का भी मौका मिला था, लेकिन एक बार फिर उनकी जगह एक अन्य लोकप्रिय अभिनेत्री (हृषिता भट्ट) को ले लिया गया।
भाषा
शुभम नरेश
नरेश