कुंभ जाति और विचारधारा से परे है: फडणवीस

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कुंभ जाति और विचारधारा से परे है: फडणवीस

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  • Publish Date - April 5, 2026 / 09:20 PM IST,
    Updated On - April 5, 2026 / 09:20 PM IST

नासिक, पांच अप्रैल (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को कुंभ मेले को भारत के सांस्कृतिक लोकाचार का प्रतीक बताया और कहा कि यह विशाल समागम सनातन संस्कृति की समावेशी भावना का प्रतिनिधित्व करता है, जहां लोग जाति या विचारधारा के आधार पर किसी भी भेदभाव के बिना एकत्रित होते हैं।

अखिल भारतीय संत समिति की बैठक के समापन समारोह को संबोधित करते हुये फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार ने 2027 के सिंहस्थ कुंभ मेले में भारी भीड़ को संभालने और श्रद्धालुओं के लिए सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए नासिक में व्यापक इंतजाम किए हैं।

फडणवीस ने जोर देकर कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम सनातन के पुनर्जागरण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और हम इसे हासिल कर रहे हैं।’’

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कुंभ एक अनूठा अवसर है, जहां सभी वर्गों के लोग एक समान रूप से भाग लेते हैं और गंगा तथा गोदावरी जैसी पवित्र नदियों के माध्यम से आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त करते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘यहां कोई जाति या धर्म के बारे में नहीं पूछता; सभी एकता की भावना से एक साथ आते हैं।’’

उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित कुंभ में लगभग आधा देश पहुंचा। हम नासिक कुंभ को लेकर उत्साहित हैं। हमें उम्मीद है कि नासिक कुंभ मेले में श्रद्धालुओं की संख्या पिछले कुंभ मेले की तुलना में 10 गुना अधिक होगी। प्रयागराज में कुंभ मेला 15,000 हेक्टेयर भूमि पर आयोजित होता है, जबकि नासिक में यह 500-700 हेक्टेयर में होता है।”

मुख्यमंत्री ने बताया कि यहां कुंभ मेले के लिए गोदावरी और कुशावर्त नदियों की सफाई, घाटों का निर्माण, मंदिरों की मरम्मत और जीर्णोद्धार, रेलवे स्टेशनों पर सुविधाओं का निर्माण और ओझर हवाई अड्डे पर नए टर्मिनल का निर्माण किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “सरकार जमीन खरीदेगी और उस पर एक स्थायी साधुग्राम स्थापित किया जाएगा। फिलहाल, 30,000 करोड़ रुपये की लागत से विकास कार्य किए जा रहे हैं। पूरा होने पर यह आंकड़ा 35,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा।”

फडणवीस ने महाराष्ट्र में लिए गए नीतिगत निर्णयों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में उनके पिछले कार्यकाल के दौरान सरकार ने गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून लागू किया था और बाद में गायों को ‘‘राज्य माता’’ का दर्जा दिया था।

उन्होंने कहा कि जबरन या धोखाधड़ी से किए जाने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए राज्य के धार्मिक स्वतंत्रता कानून के तहत कदम उठाए जाएंगे।

उन्होंने कुछ व्यक्तियों द्वारा किए जा रहे ‘‘पाखंड’’ के खिलाफ भी चेतावनी दी, जिससे संत समुदाय की प्रतिष्ठा धूमिल होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने बाद में पत्रकारों से कहा कि एक बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें कुंभ मेले से संबंधित कई विषयों पर चर्चा की गई।

इस बैठक का मुख्य उद्देश्य इस विशाल आयोजन के प्रबंधन के साथ-साथ गोदावरी नदी को स्वच्छ और निरंतर प्रवाहित रखने के उपायों पर ध्यान केंद्रित करना था।

भाषा यासिर दिलीप

दिलीप