आमिर खान के बिना नहीं बन पाती ‘लगान’ : कुमार दवे
आमिर खान के बिना नहीं बन पाती ‘लगान’ : कुमार दवे
मुंबई, 16 जून (भाषा) पटकथा लेखक कुमार दवे का कहना है कि ‘लगान’ अपने अलग विषय के कारण लंबे समय तक निर्माताओं को आकर्षित नहीं कर सकी थी और अगर आमिर खान अभिनेता के साथ-साथ निर्माता के रूप में इससे नहीं जुड़ते, तो संभवतः यह फिल्म आज भी नहीं बन पाती।
इस महीने अपनी रिलीज के 25 साल पूरे कर रही ‘लगान’ वर्ष 1893 की पृष्ठभूमि पर आधारित है। कहानी एक ऐसे भारतीय गांव के इर्दगिर्द घूमती है, जो भीषण सूखे और अंग्रेजी हुकूमत द्वारा लगाए गए भारी लगान से जूझ रहा है। गांववाले कर से मुक्ति पाने के लिए एक अंग्रेज अधिकारी की क्रिकेट चुनौती स्वीकार करते हैं। फिल्म में आमिर ने युवा किसान भुवन की भूमिका निभाई थी।
दवे ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘अगर आमिर निर्माता नहीं बनते तो यह फिल्म शायद आज भी नहीं बन पाती। उन्होंने पहले एक अभिनेता के रूप में इस कहानी पर भरोसा किया और फिर उसी विश्वास के साथ निर्माता के रूप में भी इसके साथ खड़े रहे।’’
दवे ने ‘लगान’ के सह-निर्देशक के रूप में भी काम किया था। उन्होंने कहा, ‘‘हमें ऐसा कोई निर्माता नहीं मिल रहा था, जो इस विषय पर जोखिम उठाए। लोग कहते थे कि कहानी को समकालीन बनाइए, नायक को धोती क्यों पहनानी है, उसे सूट पहनाइए। ऐसे सुझाव लगातार मिलते थे।’’
दवे ने फिल्म की पटकथा संजय दाम्या के साथ मिलकर लिखी थी। कहानी और निर्देशन आशुतोष गोवारिकर का था, जबकि संवाद केपी सक्सेना ने लिखे थे।
दवे ने कहा कि व्यावहारिक कारणों से उन्हें भी शुरू में इस परियोजना को लेकर संदेह था, हालांकि कहानी की ताकत पर उन्हें कभी शक नहीं हुआ।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पहले दिन से विषय पर कोई संदेह नहीं था। चिंता सिर्फ यह थी कि इतने बड़े और अलग तरह के विषय के लिए निर्माता कैसे मिलेगा। कहानी में एक ऐसा नायक था, जो परिस्थितियों के खिलाफ लड़ता है और उसके लिए साहस चाहिए। ‘शर्त मंजूर है’ जैसी पंक्ति फिल्म की आत्मा थी।’’
दवे ने बताया कि एक समय उन्होंने खुद गोवारिकर को यह फिल्म छोड़कर कोई समकालीन विषय चुनने की सलाह दी थी।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे याद है कि जब आशुतोष गोवारिकर ने कहा कि हम ‘लगान’ लिखेंगे, तो मैंने उन्हें रोकने की कोशिश की। मैंने कहा कि ‘पहला नशा’ और ‘बाजी’ में हम कुछ नया कर चुके हैं, अब तीसरी फिल्म के रूप में इतना जोखिम मत लीजिए। यह बहुत अंतरराष्ट्रीय सोच वाली फिल्म है और इसके लिए निर्माता ढूंढ़ना बेहद मुश्किल होगा।’’
दवे ने कहा कि इसके बावजूद गोवारिकर अपने विचार पर अडिग रहे और लगातार कहते रहे कि फिल्म बननी चाहिए।
पटकथा तैयार करने की प्रक्रिया को याद करते हुए दवे ने बताया कि वह, गोवारिकर और दाम्या मुंबई के पास कर्जत चले गए थे, जहां उन्होंने कई हफ्ते तक एकांत में रहकर पटकथा पर काम किया।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी चर्चा सुबह आठ बजे से शुरू होती थी और नाश्ते, दोपहर के भोजन, शाम की चाय और रात के खाने तक चलती रहती थी। दिन के अंत में केवल 10-15 मिनट कैरम खेलने के लिए मिलते थे। कर्जत में एक महीने के दौरान हमने पटकथा के 12 प्रारूप तैयार किए।’’
दवे ने बताया कि तीनों की सोच अलग-अलग थी, लेकिन कहानी को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने बहुमत के आधार पर निर्णय लेने का तरीका अपनाया।
उन्होंने कहा, ‘‘आशुतोष के पास मूल कहानी थी और हम उसके आधार पर पटकथा विकसित कर रहे थे। हमने तय किया था कि अगर दो लोग किसी विचार से सहमत हैं तो तीसरा उसका समर्थन करेगा, वरना बहस कभी खत्म नहीं होगी और कहानी आगे नहीं बढ़ पाएगी।’’
‘लगान’ में ग्रेसी सिंह, कुलभूषण खरबंदा, रघुबीर यादव, राजेंद्र गुप्ता, राज जुत्शी, अखिलेंद्र मिश्रा, यशपाल शर्मा, एके हंगल, श्रीवल्लभ व्यास, प्रदीप रावत, रेचल शेली और पॉल ब्लैकथॉर्न सहित कई कलाकारों ने अभिनय किया था।
आमिर के निर्माता के रूप में जुड़ने के बाद फिल्म की शूटिंग गुजरात के भुज में छह से सात महीने तक चली।
दवे ने बताया, ‘‘फिल्म की शूटिंग औपचारिक रूप से पांच जनवरी 2000 को सुबह 11 बजे शुरू हुई थी। पहला मुहूर्त शॉट सुहासिनी मुले पर फिल्माया गया था, जिन्होंने फिल्म में भुवन की मां यशोदामाई की भूमिका निभाई थी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘दृश्य में वह (मुले) आसमान की ओर देख रही थीं। भुवन उनसे पूछता है कि वह क्या देख रही हैं और वह जवाब देती हैं-‘मैं बादलों को देख रही हूं।’ यही फिल्म का पहला शॉट था।’’
फिल्म के निर्माण के दौरान आने वाली चुनौतियों के बारे में दवे ने कहा कि पूरी टीम शुरू से ही कठिनाइयों के लिए मानसिक रूप से तैयार थी।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें पहले दिन से पता था कि यह आसान फिल्म नहीं है। इसलिए हर दृश्य और हर शॉट की तैयारी उसी स्तर पर की जाती थी। हम ‘सिंक साउंड’ तकनीक से शूटिंग कर रहे थे और कई बार किसी विमान के गुजरने तक इंतजार करना पड़ता था, ताकि ध्वनि रिकॉर्डिंग प्रभावित न हो।’’
दवे ने बताया कि फिल्म की शूटिंग भीषण गर्मी और कड़ाके की सर्दी, दोनों परिस्थितियों में हुई, लेकिन टीम का लक्ष्य केवल चुनौतियों को पार करना था।
उन्होंने कहा कि आमिर की निर्माण टीम ने शूटिंग को सुचारु रूप से पूरा कराने में अहम भूमिका निभाई।
दवे ने कहा, ‘‘आमिर खान की प्रोडक्शन टीम कमाल की थी। हर छोटी-बड़ी चीज का ध्यान रखा गया। अक्सर फिल्मों में कलाकारों और तकनीशियनों के बीच टकराव देखने को मिलता है, लेकिन ‘लगान’ में ऐसा कुछ नहीं हुआ। पूरी यूनिट एक परिवार की तरह काम कर रही थी और यही इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत थी।’’
भाषा मनीषा पारुल
पारुल

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