महाराष्ट्र विधानसभा ने रामटेक राम मंदिर न्यास के पुनर्गठन के लिए विधेयक पारित किया

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महाराष्ट्र विधानसभा ने रामटेक राम मंदिर न्यास के पुनर्गठन के लिए विधेयक पारित किया

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  • Publish Date - July 10, 2026 / 04:45 PM IST,
    Updated On - July 10, 2026 / 04:45 PM IST

मुंबई, 10 जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र विधानसभा ने रामटेक में ऐतिहासिक राम मंदिर के सार्वजनिक न्यास का पुनर्गठन करने के लिए शुक्रवार को एक विधेयक पारित किया। हालांकि, विपक्ष ने राजनीतिक नेताओं और वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों का सामना कर रहे लोगों को संस्थान के प्रबंधन से दूर रखने के लिए सख्त पात्रता नियम बनाने की मांग की।

सरकार की सीधी निगरानी के तहत श्री राम मंदिर ट्रस्ट (रामटेक) स्थापित करने के विषय पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए मंत्री आशीष जायसवाल ने कहा कि मंदिर की चल व अचल संपत्तियों की सुरक्षा के लिए एक खास प्रबंध समिति और एक कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। अभी इन संपत्तियों का प्रबंधन एक उपमंडलीय अधिकारी करते हैं।

रामटेक एक तीर्थ स्थल है जो नागपुर जिले में स्थित है।

विपक्ष ने सरकार से प्रस्तावित श्री राम मंदिर देवस्थान ट्रस्ट (रामटेक) विधेयक को एक संयुक्त प्रवर समिति को भेजने का आग्रह किया। विपक्षी दलों ने उन प्रावधानों पर आपत्ति जताई जिनके तहत राजनीतिक नेताओं को मंदिर न्यास में नियुक्त किया जा सकता है। विपक्ष ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों की भी मांग की।

चर्चा में हिस्सा लेते हुए, राकांपा (शप) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने न्यास में नेताओं को नियुक्त करने के खिलाफ आगाह किया और कहा कि इससे मंदिर के कामकाज का राजनीतिकरण हो जाएगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि न्यास में राजनीतिक प्रतिनिधियों को शामिल करने से ‘‘इतना अधिक भ्रष्टाचार होगा कि अयोध्या मंदिर का (चढ़ावा चोरी) मामला भी पीछे छूट जाएगा।’’

पाटिल ने न्यासियों को रोजाना और यात्रा भत्ता देने के प्रस्ताव पर भी आपत्ति जताई तथा कहा कि मंदिर की सेवा के लिए कोई भुगतान नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने न्यासियों के लिए भगवान राम का भक्त होने का हलफनामा सौंपे जाने की जरूरत पर सवाल उठाया और तर्क दिया कि यह धर्मनिरपेक्षता के संवैधानिक सिद्धांत के खिलाफ है।

राकांपा (शप) विधायक ने श्रद्धालुओं के दान को सुरक्षित रखने के लिए अधिक मजबूत सुरक्षा उपायों की भी मांग की, जिसमें दान-पात्र खोले जाते समय अनिवार्य सीसीटीवी निगरानी, ​​दान की गिनती के लिए पारदर्शी व्यवस्था और दान का उसी दिन पंजीकरण करना शामिल है।

शिवसेना (उबाठा) के विधायक भास्कर जाधव ने सरकार से न्यासियों को हटाने और अयोग्य करार देने से जुड़े नियमों को और सख्त करने की मांग की। उन्होंने तर्क दिया कि अनैतिक आचरण से जुड़े मामलों में आपराधिक दोषसिद्धि का इंतजार करने से न्यायिक प्रक्रिया में होने वाली देरी के कारण अपात्र व्यक्ति वर्षों तक न्यास में बने रह सकते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘यह भगवान राम के मंदिर का ट्रस्ट है। कानून में कोई खामी नहीं होनी चाहिए। इस संस्थान का प्रबंधन केवल बेदाग छवि वाले लोगों द्वारा ही किया जाना चाहिए।’’

भाजपा के सुधीर मुनगंटीवार ने न्यासी के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले अदालत द्वारा दोषी करार दिये जाने की जरूरी शर्त वाले प्रस्तावित प्रावधान पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि न्यायिक कार्यवाही पूरी होने में अक्सर कई दशक लग जाते हैं।

चर्चा के दौरान, कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने भगवान राम और रामटेक मंदिर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह संस्थान लाखों लोगों की आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है, इसलिए इसके प्रबंधन में उच्चतम मानकों का पालन किया जाना चाहिए।

मंत्री जायसवाल ने विधानसभा को बताया कि मंदिर के पास काफी चल व अचल संपत्ति है। इसलिए, सरकार के नियंत्रण और देखरेख में एक प्रबंध समिति और अन्य प्रशासनिक उपाय करके, इस संस्थान को श्री राम मंदिर ट्रस्ट (रामटेक) के नाम से पुनर्गठित करने के लिए एक विशेष कानून बनाने की जरूरत है।

वडेट्टीवार ने विधेयक को संयुक्त प्रवर समिति को भेजने की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक मंदिर का प्रबंधन राजनीतिक दखल से मुक्त रहना चाहिए।

उन्होंने न्यासियों को भत्ता देने के प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि मंदिर में सेवा स्वैच्छिक होनी चाहिए, न कि श्रद्धालुओं के दान से उसका खर्च उठाया जाना चाहिए।

भाषा सुभाष नरेश

नरेश