मुंबई, आठ जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को कहा कि वह गिरजाघर और ईसाई मिशनरी संस्थाओं के कब्जे वाली उस भूमि की तीन महीने के भीतर व्यापक जांच कराएगी जो आज़ादी के बाद उन्हें ‘संदिग्ध परिस्थितियों’ में हस्तांतरित की गई थी।
राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने राज्य विधानसभा में यह घोषणा की।
भाजपा विधायक देवयानी फरांदे द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए बावनकुले ने कहा कि इस मामले की जांच और नासिक डायोसीज़न ट्रस्ट एसोसिएशन लिमिटेड से जुड़े लंबित विवाद के समाधान के लिए मंडल आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी। इस विवाद से नासिक के लगभग 5,000 परिवार प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने बताया कि समिति में सेटलमेंट कमिश्नर, डिविजनल कमिश्नर तथा पुलिस के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
फरांदे ने आरोप लगाया कि अंग्रेज शासन के दौरान ईसाई संस्थाओं द्वारा संचालित स्कूलों, कॉलेजों और अस्पतालों को आवंटित भूमि को मूल ट्रस्टियों की मौत के बाद रिकॉर्ड में हेरफेर कर निजी हाथों को सौंप दिया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य और संपत्ति के लेन-देन के लिए एक निजी कंपनी से अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए स्थानीय निवासियों से भारी रकम वसूली जा रही है। साथ ही, उन्होंने दावा किया कि वर्ष 1932 से पहले के भूमि अभिलेख और फाइलें जिला प्रशासन के रिकॉर्ड से गायब हो गई हैं।
बावनकुले ने कहा कि हालांकि यह मामला बंबई उच्च न्यायालय में लंबित है, लेकिन नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार पर प्रशासनिक जांच कराने पर कोई रोक नहीं है।
उन्होंने कहा कि समिति सेटलमेंट कमिश्नर के पास उपलब्ध अभिलेखों का सत्यापन करेगी और नासिक के अलावा नांदगांव, औरंगाबाद तथा महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में गिरजाघरों और मिशनरी संस्थाओं की भूमि की भी जांच करेगी। समिति तीन महीने के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
भाषा शोभना पवनेश
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