मुंबई, आठ जुलाई (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने अभिनेत्री प्रीति जिंटा से जुड़े सभी डीपफेक, छेड़छाड़ कर तैयार की गई तस्वीरों, फर्जी वीडियो और अन्य अनधिकृत ऑनलाइन सामग्री को हटाने का आदेश देते हुए बुधवार को कहा कि इस तरह की सामग्री का दुरुपयोग किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों को प्रभावित करता है।
न्यायमूर्ति माधव जामदार की एकल पीठ ने जिंटा को राहत देते हुए, ऑनलाइन मंचों को सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों के तहत उनकी जिम्मेदारियों की भी याद दिलाई।
अदालत ने इस तरह की सामग्री पर रोक लगाने में मध्यस्थों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनके मंचों का भी इस तरह के दुरुपयोग के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘यदि मध्यस्थ समय रहते कार्रवाई करना शुरू कर दें, तो इस तरह के अपराध करने वाले लोग स्वतः रुक जाएंगे। अन्यथा, आप भी इस देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों के हनन में भागीदार बनेंगे।’’
पीठ ने विभिन्न ऑनलाइन मंचों पर अपलोड की गई जिंटा की सभी अनधिकृत, फर्जी तस्वीरों और डीपफेक वीडियो को तत्काल हटाने का आदेश दिया।
अपनी याचिका में जिंटा ने डीपफेक और एआई के जरिए तैयार वीडियो और तस्वीरों का जिक्र किया था।
अभिनेत्री की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकटेश धोंड ने अदालत को बताया कि करीब 275 वेबसाइट पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार, ऐसी तस्वीरें और वीडियो मौजूद हैं, जिनमें उनकी तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है।
उन्होंने दलील दी कि इस तरह की सामग्री जिंटा के व्यक्तित्व अधिकार, प्रचार अधिकार और नैतिक अधिकारों का उल्लंघन करती है।
अदालत ने कहा कि पिछले 25 वर्षों से अधिक समय से फिल्म उद्योग से जुड़ीं प्रीति जिंटा ने अपने लंबे करियर के दौरान विशिष्ट पहचान बनाई है। अदालत ने कहा कि एआई से तैयार सामग्री में जिंटा की तस्वीर, चेहरे-मोहरे और हाव-भाव का अनधिकृत इस्तेमाल उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकता है और उनके अधिकारों का उल्लंघन भी करता है।
भाषा आशीष पवनेश
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