महाराष्ट्र विधान परिषद ने बीएनएसएस में संशोधन को मंजूरी दी

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महाराष्ट्र विधान परिषद ने बीएनएसएस में संशोधन को मंजूरी दी

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  • Publish Date - July 8, 2026 / 08:21 PM IST,
    Updated On - July 8, 2026 / 08:21 PM IST

मुंबई, आठ जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र विधान परिषद ने बुधवार को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) में एक संशोधन को मंजूरी दी, जिसके तहत ‘‘निवारक कार्रवाई’’ के तौर पर किसी व्यक्ति को पुलिस हिरासत में रखने की अवधि 24 घंटे से बढ़ाकर 15 से 30 दिन कर दी गई है।

इस बीच विपक्ष ने इसका विरोध करते हुए सदन से बहिर्गमन किया।

सदन ने एक अन्य संशोधन भी पारित किया, जिसके तहत बीएनएसएस की धारा 482 में बदलाव करते हुए अग्रिम जमानत या गिरफ्तारी-पूर्व जमानत मांगने वाले व्यक्ति के लिए अदालत के समक्ष उपस्थित होना अनिवार्य कर दिया गया है।

जहां विपक्षी सदस्यों ने कहा कि इन संशोधनों का दुरुपयोग किया जा सकता है और मांग की कि विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजा जाए, तो वहीं सत्तापक्ष के कुछ सदस्यों ने भी चिंताएं व्यक्त कीं।

गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने विधेयक पेश किया (जिसे अभी विधानसभा से पारित किया जाना बाकी है)।

कांग्रेस के सतेज पाटिल ने कहा कि यह विधेयक जल्दबाजी में लाया गया है और इसके प्रावधानों का पुलिस थाने स्तर पर दुरुपयोग किया जा सकता है।

शिवसेना (उबाठा) के अनिल परब ने कहा कि इस संशोधन के जरिए आईपीएस अधिकारियों के महत्वपूर्ण अधिकार अधीनस्थ अधिकारियों को दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि निवारक हिरासत की अवधि बढ़ाने का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है और यहां तक कि सत्तारूढ़ दलों को भी उस समय इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है जब वे सत्ता में नहीं होंगे।

गिरफ्तारी-पूर्व जमानत मांगने के लिए अदालत के समक्ष उपस्थित होना अनिवार्य करने संबंधी प्रावधान के संबंध में, सत्तारूढ़ भाजपा के प्रवीण दरेकर ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए सावधानी बरती जानी चाहिए कि निर्दोष लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

सत्तारूढ़ शिवसेना के ओमप्रकाश (बच्चू) कडू ने कहा कि वह उस प्रावधान का समर्थन नहीं करेंगे, जिसमें पुलिस को किसी व्यक्ति को 30 दिन तक निवारक हिरासत में रखने की अनुमति दी गई है।

निवारक हिरासत की अवधि बढ़ाकर 15 से 30 दिन करने वाले प्रावधान का बचाव करते हुए कदम ने कहा कि ऐसा केवल अदालत की अनुमति से ही किया जा सकता है।

विपक्षी दलों के विधान परिषद सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया।

कदम ने कहा कि यह प्रावधान दंड प्रक्रिया संहिता का हिस्सा था।

महाराष्ट्र विधान परिषद ने बुधवार को एक विधेयक पारित किया, जिसके तहत ऑर्केस्ट्रा और ‘लाइव’ संगीत कार्यक्रमों के लाइसेंस को अश्लील नृत्य निषेध अधिनियम के दायरे में लाया जाएगा और अधिक कड़े दंड का प्रावधान किया जायेगा।

सरकार ने कहा कि यह विधेयक- जिसे एक दिन पहले विधानसभा द्वारा पारित किया गया था-महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम, 1951 की धारा 33 के तहत जारी किए जाने वाले ऑर्केस्ट्रा लाइसेंसों के दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से लाया गया है, ताकि बार और होटलों में अश्लील नृत्य कार्यक्रमों का आयोजन न किया जा सके।

यह विधेयक गृह विभाग में राज्य मंत्री पंकज भोयर द्वारा सदन में पेश किया गया।

इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को घोषणा की कि केवल वास्तविक किसानों को ही कृषि भूमि खरीदने की अनुमति दी जाएगी और यह सुनिश्चित करने के लिए एक सख्त सत्यापन प्रणाली लागू की जाएगी कि किसान होने का झूठा दावा करने वाले धोखेबाज ऐसी भूमि का अधिग्रहण न कर सकें।

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने राज्य विधानसभा में कहा कि सरकार भूमि अभिलेख आयुक्त के माध्यम से एक सख्त सत्यापन प्रणाली लागू कर रही है, ताकि कोई भी व्यक्ति किसान होने का वैध प्रमाण प्रस्तुत किए बिना कृषि भूमि न खरीद सके।

मंत्री ने धुले जिले में कथित अनियमित भूमि सौदों और महाराष्ट्र के बाहर के लोगों द्वारा भूमि खरीदे जाने को लेकर उठाई गई चिंताओं पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा, ‘‘अब से महाराष्ट्र में किसी भी व्यक्ति को यह साबित किये बिना कि वह किसान है, भूमि खरीदने की अनुमति नहीं दी जाएगी। राज्यभर में भूमि मानचित्रण पर आधारित एक नयी प्रणाली लागू की जा रही है।’’

भाषा

देवेंद्र माधव

माधव