भारत को ग्रिड-स्तर की बैटरी क्षमता बढ़ाने की जरूरत: ईएसी-पीएम

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भारत को ग्रिड-स्तर की बैटरी क्षमता बढ़ाने की जरूरत: ईएसी-पीएम

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  • Publish Date - July 8, 2026 / 08:19 PM IST,
    Updated On - July 8, 2026 / 08:19 PM IST

नयी दिल्ली, आठ जुलाई (भाषा) देश में बिजली की चुनौती अब उत्पादन नहीं, बल्कि उसकी उपलब्धता और लचीलेपन से जुड़ी हुई है, लिहाजा ग्रिड-स्तर की बैटरी क्षमता बढ़ाना जरूरी है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) ने यह बात कही है।

ईएसी-पीएम ने बिजली ग्रिड की मौजूदा स्थिति पर जारी एक कार्यपत्र में कहा कि बिजली क्षेत्र की चुनौती का सबसे सीधा समाधान अतिरिक्त बिजली का भंडारण करना और जरूरत के समय उसे उपलब्ध कराना है।

कार्यपत्र के मुताबिक, “भारतीय ग्रिड की मुख्य समस्या अब यह नहीं रह गई है कि देश कितनी बिजली पैदा कर सकता है। समस्या यह है कि वह कब और कितनी तेजी से उत्पादन में बदलाव कर सकता है। अब बाधा क्षमता से हटकर लचीलेपन पर आ गई है।”

अध्ययन के मुताबिक, बिजली भंडारण की जरूरत और उपलब्धता के बीच सबसे बड़ा अंतर है और यह मुख्य रूप से बैटरी क्षमता से जुड़ा हुआ है। इसमें कहा गया है कि ग्रिड-स्तर पर बैटरी की तैनाती राष्ट्रीय लक्ष्य से काफी पीछे है, जबकि पंप्ड हाइड्रो क्षमता लगभग लक्ष्य तक पहुंच चुकी है।

परिषद ने कहा कि भंडारण क्षमता में हालिया वृद्धि महत्वपूर्ण है, लेकिन अब भी काफी अधिक निवेश और विस्तार की जरूरत है।

भारत के बिजली ग्रिड ने 21 मई, 2026 को नया रिकॉर्ड बनाया। उस दिन दोपहर तीन बजकर 45 मिनट पर अधिकतम बिजली मांग 270.8 गीगावाट पर पहुंच गई, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है।

इसमें कहा गया है कि भारत में बिजली की मांग न केवल विशाल है, बल्कि एक ही दिन के भीतर भी अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाली है।

कार्यपत्र के अनुसार, बड़े पैमाने पर बैटरी क्षमता विकसित करने से ‘शुद्ध भार’ को संतुलित करने में मदद मिल सकती है और यह केवल सैद्धांतिक अवधारणा नहीं है।

ईएसी-पीएम ने कहा कि बिजली ग्रिड को हर समय संतुलन बनाए रखना होता है, जहां उत्पादन और खपत बराबर होना जरूरी है।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय