महाराष्ट्र विधान परिषद ने धर्मांतरण पर रोक लगाने वाला विधेयक पारित किया

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महाराष्ट्र विधान परिषद ने धर्मांतरण पर रोक लगाने वाला विधेयक पारित किया

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  • Publish Date - March 17, 2026 / 10:19 PM IST,
    Updated On - March 17, 2026 / 10:19 PM IST

मुंबई, 17 मार्च (भाषा) महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 मंगलवार को विधान परिषद में पारित होने के साथ ही कानून बनने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ गया। इसमें जबरदस्ती, धोखाधड़ी, प्रलोभन या विवाह के जरिए कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाने के कड़े प्रावधान हैं।

राज्य विधानमंडल द्वारा विधेयक को मंजूरी दिए जाने के बाद अब इसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। विधानसभा ने एक दिन पहले ध्वनि मत से विधेयक को पारित किया था।

गृह राज्य मंत्री पंकज भोयर ने इस विधेयक को परिषद में पेश किया।

विपक्षी दल शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने इस विधेयक का समर्थन किया है, जबकि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इसका विरोध किया है।

इस विधेयक के अनुसार, विवाह के बहाने गैरकानूनी रूप से धर्मांतरण कराने वालों को सात साल की जेल की सजा होगी और उन पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा।

यह विधेयक प्रलोभन, गलतबयानी, बल प्रयोग, अनुचित प्रभाव, दबाव या किसी अन्य कपटपूर्ण तरीके से कराए गए धर्मांतरण को प्रतिबंधित करता है। इसमें धर्मांतरण की प्रक्रिया का विस्तृत वर्णन है, जिसमें धर्मांतरण के इरादे की घोषणा करते हुए सक्षम प्राधिकारी को पूर्व सूचना प्रस्तुत करना शामिल है।

इस विधेयक में धर्मांतरण करने वाले व्यक्ति और धर्मांतरण का आयोजन करने वाले संस्थान द्वारा धर्मांतरण के बाद सक्षम प्राधिकारी के समक्ष घोषणाएं करना अनिवार्य किया गया है।

विधेयक के उद्देश्यों और कारणों के अनुसार, जबरन, अनैच्छिक या नागरिकों की स्वतंत्र सहमति को प्रभावित कर किए जाने वाले धर्मांतरण के मामले बढ़ रहे हैं और विभिन्न संगठनों द्वारा इन्हें संगठित तरीके से अंजाम दिया जा रहा है।

भोयर ने कहा कि महाराष्ट्र में इस तरह के धर्मांतरण को विनियमित करने के लिए कोई कानून नहीं है।

उन्होंने कहा कि ओडिशा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड और तमिलनाडु सहित कई राज्यों ने पहले ही इस तरह के जबरन और गैरकानूनी धर्मांतरण को प्रतिबंधित करने वाले समान कानून बना लिए हैं।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधान परिषद सदस्य शशिकांत शिंदे ने कहा कि यह साबित करना जरूरी है कि यह विधेयक किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं है।

भाषा आशीष पवनेश

पवनेश