मुंबई, 29 जून (भाषा) महाराष्ट्र के कृषि विभाग ने राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों में फसल बीमा की निधि से जुड़े जो लिखित जवाब दिए हैं, उनमें अलग-अलग आंकड़े हैं, जिसे लेकर हैरानी जताई जा रही है।
कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने विधानसभा को बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कंपनियों ने लगभग 6,944.11 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया, जबकि परिषद में पेश किए गए लिखित जवाब में इसी अवधि के लिए यह आंकड़ा लगभग 8,516.97 करोड़ रुपये बताया गया। दोनों आंकड़ों में 1,500 करोड़ रुपये से ज़्यादा का अंतर है।
फसल बीमा योजना को लागू करने और बीमा कंपनियों की वित्तीय स्थिति से जुड़े अलग-अलग तारांकित सवालों के लिखित जवाबों में दिए गए आंकड़े एक-दूसरे से अलग हैं।
विधान परिषद में भरणे ने सोमवार को बताया कि 2016 से 2024-25 तक, इस योजना के तहत बीमा कंपनियों को कुल 52,563.22 करोड़ रुपये का प्रीमियम मिला, जबकि किसानों को 37,625.69 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया।
उन्होंने बताया कि चूंकि राज्य सरकार ने 2022 से बीमा कंपनियों के मुनाफे को कुल प्रीमियम के 20 प्रतिशत तक सीमित कर दिया था, इसलिए बीमा कंपनियों ने 8,516.97 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया और 5,583.03 करोड़ रुपये अतिरिक्त प्रीमियम के तौर पर राज्य सरकार को वापस किए।
हालांकि, बृहस्पतिवार को विधानसभा में पेश किए गए एक लिखित जवाब में मंत्री ने बताया कि बीमा कंपनियों को 2016 से 2025-26 के बीच कुल 55,426 करोड़ रुपये का प्रीमियम मिला, जबकि किसानों को 39,918.55 करोड़ रुपये का मुआवज़ा दिया गया।
उसी जवाब में कहा गया है कि लाभ पर ऊपरी सीमा लागू होने के बाद बीमा कंपनियों ने 6,944.11 करोड़ रुपये का कुल लाभ कमाया और इसी तरह राज्य सरकार को 5,583.03 करोड़ रुपये वापस किए।
मौजूदा खरीफ मौसम के तहत मुआवजे के मामले में भी दोनों जवाबों में अंतर था।
दोनों जवाबों में यह स्वीकार किया गया कि फसल बीमा दावों के निपटारे में देरी की शिकायतें कुछ हद तक सही थीं, और यह भी बताया गया कि तालुका, जिला, मंडल और राज्य स्तर पर शिकायत निवारण समितियां काम कर रही हैं।
भाषा प्रशांत अविनाश
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