मुंबई, 28 फरवरी (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने शनिवार को कहा कि महाराष्ट्र की कृषि को लेकर तैयार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) नीति एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन इसका कार्यान्वयन धीमा रहा है।
उन्होंने किसानों की आय, फसलों की कीमतों और ग्रामीण अवसंरचना को लेकर भी चिंता व्यक्त की।
पाटिल ने विधानसभा में हुई बहस में हिस्सा लेते कहा कि यह उत्साहजनक है कि सरकार विभाजनकारी मुद्दों से दूर हटकर एआई जैसे आधुनिक क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिसका व्यापक उपयोग उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और बैंकिंग क्षेत्रों में हो रहा है और अब यह कृषि क्षेत्र में भी प्रवेश कर रहा है।
उन्होंने कहा कि मिट्टी की नमी मापने वाले सेंसर, मौसम पूर्वानुमान प्रणाली, फसल रोग का पता लगाने वाले ऐप और ड्रोन आधारित फसल निगरानी जैसे एआई उपकरण उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं, लेकिन सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि इसका लाभ आम किसानों तक पहुंचे।
पाटिल ने कहा कि तत्कालीन वित्त मंत्री अजित पवार ने पिछले बजट में एआई पहलों के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए थे, लेकिन अब तक एक रुपया भी खर्च नहीं हुआ है। उन्होंने इस संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी।
पाटिल ने दावा किया कि मुंबई में हाल ही में आयोजित ‘एआई फॉर एग्री 2026’कार्यक्रम से जमीनी स्तर के किसानों को कोई लाभ नहीं मिला। उन्होंने जमीनी स्तर पर काम करने की बजाय शिखर सम्मेलनों को प्राथमिकता देने के लिए सरकार की आलोचना की।
पाटिल ने सफल उदाहरणों का हवाला देते कहा कि राज्य के कुछ हिस्सों में किसानों ने एआई आधारित प्रणालियों का उपयोग करके गन्ने की बहुत अधिक पैदावार हासिल की है और वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट जैसे संस्थानों ने प्रौद्योगिकी आधारित खेती में सराहनीय कार्य किया है।
भाषा
राखी धीरज
धीरज