मुंबई, आठ जून (भाषा) बम्बई उच्च न्यायालय ने सोमवार को महाराष्ट्र सरकार को आदेश दिया कि वह नवंबर 2013 में पुणे के यरवदा मनोरुग्णालय में एक अन्य मरीज के हमले में जान गंवाने वाले व्यक्ति की पत्नी को 22 लाख रुपये का मुआवजा दे।
अदालत ने कहा कि राज्य सरकार अस्पताल में भर्ती मरीजों की पर्याप्त देखभाल करने में विफल रही।
उच्च न्यायालय ने कहा कि अस्पताल के अधिकारियों की ओर से घोर लापरवाही बरती गई, जिसके कारण यह घटना हुई। अदालत ने यह भी माना कि घटना में जान गंवाने वाला व्यक्ति राज्य सरकार की देखरेख में था, क्योंकि इस अस्पताल का संचालन सरकार करती है।
न्यायमूर्ति मनीष पिटाले और न्यायमूर्ति श्रीराम शिरसात की पीठ ने इस घटना को ‘‘भयावह और दुर्भाग्यपूर्ण’’ बताया।
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘राज्य सरकार देखभाल करने और अपने सार्वजनिक कर्तव्य का निर्वहन करने में विफल रही, जिसके परिणामस्वरूप मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ। यह मामला दर्शाता है कि राज्य के अधिकारी अस्पताल में किस प्रकार घोर लापरवाही से कामकाज संभाल रहे थे।’’
अदालत ने कहा कि जैसा कि राज्य सरकार ने स्वीकार किया है, घटना की रात निगरानी कक्ष में 72 मरीज थे, जबकि ड्यूटी पर केवल तीन परिचारक मौजूद थे।
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘यह स्पष्ट है कि परिचारकों की संख्या बेहद कम थी, इसके अलावा यह मनोरुग्णालय में मरीजों के लिए न्यूनतम सुविधाओं का भी उल्लंघन है।’’
उच्च न्यायालय ने महिला और उसकी दो संतान द्वारा सरकार से मुआवजे की मांग करते हुए दायर याचिका पर यह आदेश पारित किया। याचिका में दावा किया गया था कि महिला के 52-वर्षीय पति की यरवदा मनोरुग्णालय में एक अन्य मरीज के हमले में मौत हो गई।
पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को मुआवजे की राशि आठ सप्ताह के भीतर भुगतान की जाए।
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