ठाणे, 12 मार्च (भाषा) महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक त्वरित अदालत ने लगभग सात साल पहले 13 वर्षीय लड़के का यौन उत्पीड़न करने वाले व्यक्ति को दोषी करार देते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत द्वारा सात मार्च को दिए आदेश, जिसकी एक प्रति बृहस्पतिवार को उपलब्ध कराई गई, में न्यायाधीश वी ए पत्रावले ने विक्की उर्फ गुडया दत्ता थोराट (34) पर 31,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।
विशेष लोक अभियोजक कादंबिनी खंडागले के अनुसार, यह घटना आठ सितंबर 2018 को हुई थी, जब थोराट ने उल्हासनगर क्षेत्र के एक सार्वजनिक शौचालय में नाबालिग का यौन उत्पीड़न किया था।
किशोर ने अदालत को बताया कि थोराट ने इस घटना के बारे में किसी को बताने पर उसे जान से मारने की धमकी दी थी।
हालांकि बचाव पक्ष ने लड़के के बयानों में विरोधाभास और शरीर पर चोटों के अभाव का हवाला दिया, लेकिन अदालत ने इन दलीलों को खारिज कर दिया।
अदालत ने कहा, ‘चिकित्सकीय साक्ष्यों की किसी भी पुष्टि के अभाव में भी अभियोक्ता (नाबालिग) की मौखिक गवाही ठोस, विश्वसनीय और भरोसेमंद पाई गयी है और उसे स्वीकार किया जाना चाहिए।’
अदालत ने कहा कि इस बात का कोई रिकॉर्ड नहीं है कि किशोर या उसके परिवार का आरोपी से कोई विवाद था। अदालत ने कहा, ‘ऐसी परिस्थितियों में उसके लिए झूठी कहानी गढ़कर अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगाकर आरोपी को फंसाने का कोई कारण नहीं है।’
अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित करने के लिए लड़के और उसके माता-पिता सहित नौ गवाह पेश किए।
अदालत ने थोराट को भारतीय दंड संहिता और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत दोषी पाया और उसे 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
भाषा
शुभम पवनेश
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