ठाणे, 25 अप्रैल (भाषा) महाराष्ट्र में ठाणे जिले की एक विशेष अदालत ने 28 वर्षीय एक युवक को नाबालिग से शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के आरोप से यह कहते हुए बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि घटना के समय पीड़िता की उम्र कम थी, और उपलब्ध तथ्यों से प्रतीत होता है कि संबंध सहमति पर आधारित थे।
विशेष न्यायाधीश एस. पी. अग्रवाल ने आरोपी शमशेर रईस खान को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एन) (बार-बार दुष्कर्म) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत लगे आरोपों से मुक्त कर दिया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी और पीड़िता एक ही मोहल्ले में रहते थे तथा दोनों के बीच प्रेम संबंध था।
इसने दावा किया कि नवंबर 2019 में खान ने लड़की से शादी का वादा किया और एक खाली घर में ले जाकर उससे दुष्कर्म किया। यह मामला तब सामने आया जब जनवरी में किशोरी का चिकित्सकीय परीक्षण हुआ, जिसमें उसके गर्भवती होने का पता चला।
हालांकि, अदालत ने पाया कि पीड़िता की उम्र को लेकर साक्ष्यों में गंभीर खामियां हैं।
न्यायाधीश ने इस बात पर गौर किया कि मां द्वारा प्रस्तुत जन्म प्रमाणपत्र में ‘‘जन्म वर्ष में छेड़छाड़ की गई थी’’। वहीं, मेडिकल टीम द्वारा की गई जांच में पीड़िता की उम्र 16 से 17 वर्ष के बीच आंकी गई।
अदालत ने कहा, “जांच की रिपोर्ट और पीड़िता व उसकी मां के बयानों में इस बात को लेकर असंगति कि घटना के समय वह किस कक्षा में पढ़ रही थी, इस संदेह को जन्म देते हैं कि घटना के समय वह बालिग रही हो।”
जिरह के दौरान पीड़िता ने स्वीकार किया कि वह आरोपी को पसंद करती थी और अपनी इच्छा से उससे मिलने गई थी।
अदालत ने अपने आदेश में कहा, “प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि दोनों एक-दूसरे से प्रेम करते थे और उनके बीच शारीरिक संबंध सहमति से बने थे।”
भाषा खारी नेत्रपाल
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