मुंबई जलवायु सप्ताह : जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने वैश्विक विशेषज्ञों से चर्चा की

मुंबई जलवायु सप्ताह : जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने वैश्विक विशेषज्ञों से चर्चा की

मुंबई जलवायु सप्ताह : जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने वैश्विक विशेषज्ञों से चर्चा की
Modified Date: February 23, 2026 / 05:27 pm IST
Published Date: February 23, 2026 5:27 pm IST

(अपर्णा बोस)

मुंबई, 23 फरवरी (भाषा) वैश्विक जलवायु में तेजी से आ रहे बदलाव और उसके नकारात्मक असर पर चर्चा के लिए आयोजित तीन दिवसीय ‘मुंबई जलवायु सप्ताह’ में न केवल शीर्ष वैश्विक पहचान वाले कार्यकर्ताओं और नेताओं की भागीदारी देखी गई, बल्कि जमीनी स्तर के और पंचायत नेताओं ने भी मंच साझा किया। यह आयोजन 19 फरवरी को समाप्त हुआ।

महाराष्ट्र के भंडारा के एक ग्राम परिषद नेता ने कहा कि जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई जमीनी स्तर से तब शुरू होती है जब पंचायत जिम्मेदारी लेती है और लोग भाग लेते हैं, तभी वास्तविक बदलाव आता है।

छह राज्यों के जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं ने जलवायु सप्ताह के उद्घाटन सत्र में हिस्सा लिया, जिसका उद्देश्य यह प्रदर्शित करना था कि प्रभावी जलवायु समाधान अक्सर ग्राम परिषदों से निकलते हैं, न कि केवल सम्मेलन कक्षों से।

महाराष्ट्र के भंडारा जिले के बेला गांव की निर्वाचित मुखिया शारदा गायधाने ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से बातचीत में रेखांकित किया कि वास्तविक जलवायु कार्रवाई ‘हमारे द्वारा लिए गए निर्णयों और हमारे द्वारा बदली गयी आदतों’ से शुरू होती है।

उन्होंने कहा कि जब ग्राम परिषद आगे आती है और समुदाय एकजुट होकर खड़ा होता है, तो प्रगति केवल एक विचार नहीं रह जाती बल्कि एक साझा उपलब्धि बन जाती है।

शारदा गायधाने ने कहा, ‘‘जलवायु परिवर्तन हमारे लिए कोई दूर का खतरा नहीं है, यह पहले से ही हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है। यह हमारी आजीविका, हमारे स्वास्थ्य और हमारे बच्चों के भविष्य पर असर डालता है। एक सामुदायिक नेता के रूप में, मेरा कर्तव्य है कि मैं तत्परता और जिम्मेदारी के साथ इसका जवाब दूं।’’

जलवायु सप्ताह के दौरान, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, बिहार, झारखंड और ओडिशा के प्रतिनिधियों ने जलवायु अनुकूल स्थिति बनने के प्रत्यक्ष अनुभव साझा किए, जिसमें सौर ऊर्जा का इस्तेमाल को बढ़ावा देना और पंचायत नियोजन में सतत कृषि को एकीकृत करना शामिल है।

झारखंड के बोकारो में स्थित सियारी ग्राम परिषद के प्रमुख रामवृक्ष मुर्मू ने बताया कि कैसे उनके गांव में बार-बार बिजली कटौती होती थी, जिससे नियमित रूप से घर अंधेरे में डूब जाते थे और बच्चों की शिक्षा बाधित होती थी।

मुर्मू ने बताया कि कैसे गांव ने बाहरी मदद पर निर्भर हुए बिना इस मुद्दे के लिए स्थानीय समाधान खोजे। उन्होंने बताया कि कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व कोष के सहयोग से क्षेत्र में क्रमवार तरीके से 72 सौर स्ट्रीट लाइटें लगाई गईं।

पंचायतों का सम्मेलन (सीओपी) एक बहु-हितधारक पहल है जो जमीनी स्तर पर स्थित पंचायती राज संस्थानों (पीआरआई) को स्थानीय जलवायु कार्रवाई और सतत विकास का नेतृत्व करने के लिए सशक्त बनाती है।

मुर्मू ने बताया कि सियारी ग्राम परिषद ने विद्यालयों और सामुदायिक भवनों में सौर ऊर्जा के उपयोग का विस्तार किया और मुख्य तालाब में सौर ऊर्जा संचालित लिफ्ट सिंचाई प्रणाली शुरू की जिससे अनियमित बिजली आपूर्ति और महंगे डीजल पर निर्भरता कम हुई।

ओडिशा के कोरापुट से चुनी गई एक अन्य प्रतिनिधि, जयंती नायक ने रेखांकित किया कि कैसे आदिवासी महिलाओं के एक समूह ने भूमि उपयोग का दस्तावेजीकरण किया और 10 हेक्टेयर से अधिक अनुपयुक्त सार्वजनिक भूमि को उपयोग लायक बनाया।

केरल के त्रिशूर जिले के पेरिनजानम ग्राम परिषद के पूर्व अध्यक्ष सचिथ के.के. ने बताया कि कैसे वर्षों के निरंतर प्रयासों के बाद, 850 परिवारों ने छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाया जिससे बिजली बिल में कमी के साथ कार्बन उत्सर्जन में कमी आई।

नयी दिल्ली स्थित सामाजिक प्रभाव संगठन और परामर्श फर्म ‘पॉलिसी एंड डेवलपमेंट एडवाइजरी ग्रुप’ के सह-संस्थापक अरिंदम बनर्जी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि सीओपी की परिकल्पना संयुक्त राष्ट्र के पक्षकारों के सम्मेलन के विकल्प के रूप में की गई थी। उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य स्थानीय शासन प्रणालियों को मजबूत करना और उभरते जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए स्थानीय स्वशासन संस्थानों की क्षमता बढ़ाने के तरीकों का पता लगाना था।

‘मुंबई जलवायु सप्ताह’ में जमीनी स्तर पर जलवायु कार्रवाई के महत्व को रेखांकित करते हुए एसोसिएशन फॉर सोशली एप्लीकेबल रिसर्च की सीईओ विनूता गोपाल ने बताया कि प्रभावी जलवायु समाधानों के लिए केवल ऊपर से थोपी गई नीतियों की नहीं, बल्कि समुदायों की सक्रिय भागीदारी और सहयोग की आवश्यकता होती है।

भाषा धीरज प्रशांत

प्रशांत


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