मुंबई अदालत ने जब्त किए गए घोड़े को उसके मालिक को लौटाने की याचिका खारिज कर दी
मुंबई अदालत ने जब्त किए गए घोड़े को उसके मालिक को लौटाने की याचिका खारिज कर दी
मुंबई, 19 फरवरी (भाषा) मुंबई की एक अदालत ने पशु क्रूरता के आरोप में जब्त किए गए एक घोड़े को वापस करने की याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने एक व्यक्ति के आजीविका के दावे के बजाय पशु कल्याण को प्राथमिकी दी।
इस घोड़े का पारंपरिक समारोहों में इस्तेमाल किया जाता था।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (मजगांव अदालत) मुजीबुद्दीन एस. शेख ने इस महीने की शुरुआत में पारित एक फैसले में घोड़े को उसके मालिक को लौटाने के बजाय पशु कल्याण बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त केंद्र में रखने के मजिस्ट्रेट के निर्णय को बरकरार रखा।
पेटा (पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स) द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी के आधार पर पुलिस ने पिछले साल दक्षिण मुंबई से पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत घोड़े को जब्त किया था।
पारंपरिक समारोहों में घोड़े किराए पर देने का व्यवसाय करने वाले जगन्नाथ कुंजुप्रसाद राजभर ने बाद में मजिस्ट्रेट अदालत में घोड़े की वापसी के लिए याचिका दायर की थी।
राजभर ने कहा था कि वह शादी समारोहों में बग्गियों के लिए घोड़े मुहैया कराते थे और उनके पास वैध और आवश्यक दस्तावेज हैं।
राजभर ने दावा किया कि उन्होंने पिछले साल मई में एक शादी समारोह के लिए घोड़ा मुहैया कराया था, जहां किसी ने उसकी तस्वीर खींचकर झूठी प्राथमिकी दर्ज करा दी थी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने घोड़े के साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार नहीं किया था।
पिछले साल जुलाई में दिए गए अपने फैसले में मजिस्ट्रेट ने कहा था कि राजभर शहर में कारोबार कर रहा था, लेकिन उसने इसके लिए कोई लाइसेंस नहीं दिखाया था।
राजभर की याचिका को खारिज करते हुए मजिस्ट्रेट ने घोड़े की अंतरिम हिरासत दो लाख रुपये के बांड पर और इस शर्त पर पेटा को सौंप दी कि संगठन अदालत के निर्देशानुसार घोड़े को वापस कर देगा।
मजिस्ट्रेट के फैसले के बाद उस व्यक्ति ने सत्र न्यायालय में एक आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की, जिसका पेटा और पुलिस ने यह तर्क देते हुए विरोध किया कि संपत्ति वापसी आदेश के खिलाफ यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।
सत्र न्यायाधीश ने हस्तक्षेपकर्ता और पुलिस की दलीलों को दमदार पाते हुए राजभर की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।
भाषा
यासिर वैभव
वैभव

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