मुंबई मॉल मामले में गिरफ्तार आरोपी ने चैटजीपीटी से बनाया था पीएमओ का फर्जी पहचान पत्र: पुलिस
मुंबई मॉल मामले में गिरफ्तार आरोपी ने चैटजीपीटी से बनाया था पीएमओ का फर्जी पहचान पत्र: पुलिस
मुंबई, 11 सितंबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दौरे से पहले मुंबई के एक मॉल में गिरफ्तार किए गए एक व्यक्ति के पास से मिला फर्जी पीएमओ पहचान पत्र बनाने के लिए कथित तौर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) टूल्स का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस ने शुक्रवार को यहां एक अदालत को यह जानकारी दी।
अदालत ने आरोपी और उसके सहयोगी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
पुलिस ने यह बात मुख्य आरोपी रोहन पारिख (24) और उसके सहयोगी दिलीप कुंडे (49) की पुलिस हिरासत खत्म होने पर अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एस्प्लेनेड अदालत) डी. एस. खेडेकर के सामने कही।
अदालत ने दोनों आरोपियों से हिरासत में और पूछताछ करने का पुलिस का अनुरोध खारिज कर दिया और दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
इसके बाद उन्होंने जमानत की अर्जी दाखिल की और कहा कि उन्हें हिरासत में रखना उचित नहीं है और इसका कोई फायदा नहीं है।
दस्तावेजों में की गई जालसाजी की जानकारी देते हुए जांचकर्ताओं ने अदालत को बताया कि पारिख के घर की तलाशी के दौरान चैटजीपीटी का इस्तेमाल करके बनाए गए पीएमओ से जुड़े कई फर्जी दस्तावेज जब्त किए गए।
जांचकर्ताओं ने कहा, “पारिख ने स्वीकार किया है कि उसने 2025 से अपने परिवार और समाज में अपनी सामाजिक स्थिति और दबदबा बढ़ाने के लिए चैटजीपीटी की मदद से पीएमओ का फर्जी पहचान पत्र और उससे जुड़े दस्तावेज बनाए थे।”
पुलिस ने बताया कि उसके फोन का डेटा निकाला गया, जिससे यह पता चला कि उसने पीएमओ से जुड़े पत्र तैयार करने की जानकारी खोजी थी।
पुलिस ने कहा कि यह पता लगाने के लिए पारिख की हिरासत जरूरी है कि उसने किसी अन्य स्थान पर भी इन फर्जी पीएमओ दस्तावेजों या पहचान पत्र का इस्तेमाल किया था या नहीं।
पुलिस ने यह भी कहा कि पूर्व सैन्य कर्मी कुंडे के पास से रिवॉल्वर बरामद हुई थी और उसने माना है कि उसके निजी इस्तेमाल के लिए रखे हथियार का इस्तेमाल पारिख के पेशेवर अंगरक्षक के रूप में व्यावसायिक तौर पर किया जा रहा था।
हालांकि, दोनों आरोपियों की ओर से पेश हुए वकील सतीश मानेशिंदे ने कहा कि आरोपियों ने स्वीकार कर लिया है कि उन्होंने ही दस्तावेज तैयार किए थे और इसमें कोई तीसरा व्यक्ति शामिल नहीं था, इसलिए किसी और बात का पता लगाने के लिए आगे हिरासत की जरूरत नहीं है।
उन्होंने दलील दी कि पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और कई अन्य दस्तावेज पहले ही जब्त कर चुकी है और अब कुछ भी उजागर होना बाकी नहीं है।
उन्होंने अदालत से कहा कि आरोपियों से अब और कुछ भी जब्त करना बाकी नहीं है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि हिरासत बढ़ाने के लिए पेश की गई रिपोर्ट में जो आधार बताए गए हैं, उन पर गौर करने के बाद आगे की पुलिस हिरासत उचित प्रतीत नहीं होती। इसके बाद अदालत ने आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
यह घटना सात सितंबर को बीकेसी स्थित जियो वर्ल्ड प्लाजा मॉल में हुई थी। इसके एक दिन बाद पास में स्थित नीता मुकेश अंबानी सांस्कृतिक केंद्र के ‘ग्लोबल फिनटेक फेस्ट’ 2026 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कार्यक्रम निर्धारित था।
पारिख को फर्जी पीएमओ कार्ड के साथ गिरफ्तार किया गया था। उसके साथ मौजूद कुंडे के पास हथियार मिला था और इसी को लेकर दोनों और मॉल के सुरक्षा कर्मचारियों के बीच बहस हुई थी।
बहस के दौरान पारिख ने खुद को कथित तौर पर पीएमओ का अधिकारी बताया था।
बाद में पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस घटना का अगले दिन होने वाले प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से कोई संबंध नहीं था।
भाषा जोहेब अविनाश
अविनाश

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