BMC Election Result, image source: Emmanual Yogini
Mumbai News: बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) के लिए हुए चुनाव में बहुकोणीय लड़ाई, विपक्षी महा विकास आघाडी (एमवीए) खेमे में टकराव और विरोधियों के बीच एक ठोस रणनीति का अभाव भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सत्ता की कुर्सी पर काबिज होने में मददगार साबित हुआ (BMC Election Result) और संभवत: पहली बार देश के सबसे अमीर नगर निकाय में उसका महापौर होगा।
टेलीविजन समाचार चैनलों द्वारा शुक्रवार शाम को प्रसारित रुझानों के अनुसार, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की कुल 227 सीट में से 210 के रुझान सामने आए हैं जिनमें से भाजपा 90 सीटों पर आगे चल रही थी। BMC Election Resultउसकी सहयोगी शिवसेना 28 सीट पर, विपक्षी शिवसेना (उबाठा) 57 सीट पर, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना(मनसे)नौ सीट पर, कांग्रेस 15 सीट पर, राज्य सरकार में सहयोगी लेकिन अलग लड़ रही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) तीन पर और अन्य आठ सीट पर बढ़त बनाए नजर आ रहे थे।
भाजपा ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ गठबंधन में 15 जनवरी को बीएमसी चुनाव लड़ा, जबकि उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना(उबाठा)और राज ठाकरे नीत मनसे चुनाव पूर्व गठबंधन कर मैदान में उतरे। BMC Election Resultराज्य स्तर पर कांग्रेस, शिवसेना (उबाठा) और शरद पवार नीत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) के साथ गठबंधन महा विकास अघाडी (एमवीए) का हिस्सा है, लेकिन बीएमसी चुनाव में वह प्रकाश आंबेडकर के नेतृत्व वाली वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए) और राष्ट्रीय समाज पक्ष (आरएसपी) के साथ मैदान में उतरी।
शिवसेना (उबाठा) और कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन ने एमवीए को करारा झटका दिया है। इससे गठबंधन की गंभीर संगठनात्मक कमजोरियां उजागर हुई हैं और महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को चुनौती देने की विपक्षी गठबंधन की क्षमता पर सवाल उठे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक एमवीए के भीतर आंतरिक विरोधाभास, कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) के बीच वैचारिक मतभेद, व्यक्तिगत टकराव और समन्वित रणनीति की कमी ने चुनावों में गठबंधन की प्रभावशीलता को कमजोर कर दिया है। उन्होंने बताया कि मूल शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा)में विभाजन, साथ ही कांग्रेस के स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने के फैसले ने लगभग 200 वार्ड में भाजपा विरोधी वोटों को प्रभावी रूप से कमजोर कर दिया।
मुंबई को कभी कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) का गढ़ माना जाता था और यहां पर खराब प्रदर्शन दोनों दलों को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक झटका है। BMC Election Result उद्धव ठाकरे की शिवसेना (उबाठा)के लिए यह परिणाम एक राजनीतिक दुस्वप्न से कम नहीं है। मुंबई अविभाजित शिवसेना आंदोलन का उद्गम स्थल था और दो दशकों से अधिक समय तक पार्टी के नियंत्रण में रहा। बीएमसी का हाथ से निकल जाना 2022 के विभाजन के बाद से पार्टी के नाटकीय पतन का प्रतीक है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि ये रुझान अंतिम परिणामों में तब्दील होते हैं, तो वे शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे की विरासत के ‘वास्तविक’ उत्तराधिकारी होने के शिंदे के दावे को सही साबित करेंगे और यह संकेत देंगे कि पार्टी के पारंपरिक मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग सत्तारूढ़ गठबंधन के घटक दल के प्रति निष्ठावान हो चुका है।
विश्लेषकों के मुताबिक इस करारी हार से विपक्षी गठबंधन में उद्धव ठाकरे हाशिए पर जा सकते हैं।BMC Election Result उन्होंने कहा कि अगर एमवीए बाद में फिर से संगठित होता है, तो उद्धव ठाकरे और शरद पवार, जिनकी पार्टी राकांपा (शप) भी गठबंधन में भागीदार है, को दरकिनार किया जा सकता है क्योंकि कांग्रेस ने वीबीए और आरएसपी के साथ हाथ मिला लिया है।
कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन ने शहरी मतदाताओं, विशेष रूप से मुंबई जैसे महानगर में, उनसे जुड़ने में उसकी लगातार अक्षमता को उजागर किया। केंद्र में विपक्षी गठबंधन का मुख्य आधार होने के बावजूद, पार्टी भाजपा विरोधी दलों के बीच राष्ट्रीय स्तर की एकता को स्थानीय स्तर पर चुनावी लाभ में तब्दील करने में विफल रही है।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने स्वीकार किया कि संगठनात्मक कमजोरी, विश्वसनीय स्थानीय नेतृत्व की कमी और शहरी मुद्दों को संबोधित करने में विफलता ने इसके निराशाजनक प्रदर्शन में योगदान दिया है।BMC Election Resultविश्लेषकों का कहना है कि इस हार ने एमवीए के लिए अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है। शिवसेना(उबाठा)और कांग्रेस, दोनों प्रमुख साझेदारों के खराब प्रदर्शन की वजह से सत्तारूढ़ ‘महायुति’ गठबंधन के विश्वसनीय विकल्प होने का गठबंधन का दावा खोखला प्रतीत होता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि शिवसेना(उबाठा)और कांग्रेस दोनों के सामने अब संगठनात्मक पुनर्निर्माण और रणनीतिक पुनर्विचार का कठिन कार्य है। BMC Election Resultउद्धव ठाकरे के लिए चुनौती यह साबित करना है कि महाराष्ट्र की राजनीति में उनका गुट एमवीए में भागीदार होने के अलावा भी प्रासंगिक बना हुआ है।
विश्लेषकों के मुताबिक बीएमसी चुनावों के अंतिम परिणाम से विपक्षी खेमा पुनर्गठन के दौर में जा सकता है, जिसमें छोटी पार्टियां संभावित रूप से अपने सहयोगियों की व्यवहार्यता के आधार पर अपने गठबंधन विकल्पों पर पुनर्विचार कर सकती हैं। उन्होंने भाजपा नीत गठबंधन की 100 सीटों के आंकड़े को पार जाने के पीछे एक विशिष्ट, निर्णायक कारक की ओर इशारा किया और यह है एक खंडित विपक्ष जिसने मुकाबले को ‘दोस्ताना लड़ाइयों’ और बहुकोणीय मुकाबलों’ की शृंखला में बदल दिया।
सबसे स्पष्ट विभाजन पारंपरिक मराठी बहुल क्षेत्रों में देखने को मिला। जहां शिवसेना (उबाठा) और मनसे ने रणनीतिक मोर्चा बनाया, वहीं भाजपा के साथ-साथ शिंदे की शिवसेना ने भी उनका डटकर मुकाबला किया। BMC Election Resultशहर के 80 से अधिक वार्ड में, दोनों शिवसेनाओं ने एक ही ‘‘धनुष और बाण’’ की विरासत के लिए जमकर संघर्ष किया।
कांग्रेस का शिवसेना (उबाठा)-मनसे गठबंधन में शामिल होने से इनकार विपक्ष की संभावनाओं को दूसरा बड़ा झटका साबित हुआ। अकेले चुनाव लड़कर कांग्रेस का लक्ष्य अल्पसंख्यक और दलित मतदाताओं को एकजुट करना था। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि इस रणनीति से धर्मनिरपेक्ष वोटों में तीन-तरफ़ा विभाजन हुआ।
विश्लेषकों के मुताबिक कई इलाकों में, वीबीए और समाजवादी पार्टी के साथ कांग्रेस उम्मीदवारों की मौजूदगी ने शिवसेना(उबाठा)के लिए ‘बाधा’ का काम किया। उन्होंने कहा कि इस बिखराव ने यह सुनिश्चित किया कि ‘महायुति विरोधी’ भावना कभी भी चरम पर न पहुंच पाए।
खबरों के मुताबिक कम से कम 15 सीट पर ‘‘ दोस्ताना मुकाबले’’ हुए, जिनमें गठबंधन के सहयोगी दलों (भाजपा विरोधी दलों) ने एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार उतारे।BMC Election Result इन आंतरिक कलह ने न केवल मतदाताओं को भ्रमित किया, बल्कि विपक्ष के संसाधनों को सीमित कर दिया, जिससे भाजपा को चुनौती देने से उनका ध्यान भटक गया।