ठाणे(महाराष्ट्र), 15 अप्रैल (भाषा) ठाणे के तहसीलदार कार्यालय ने मुंब्रा से एआईएमआईएम की पार्षद सहर शेख के पिता यूनुस इकबाल शेख पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करने और उसके आधार पर अपनी बेटी के लिए जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने के आरोप में आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की है।
सहर शेख जनवरी में हुए महानगरपालिका चुनावों के बाद उस वक्त सुर्खियों में आई थीं, जब उन्होंने अपने पहले ही चुनाव में स्थानीय विधायक जितेंद्र आव्हाड समर्थित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) उम्मीदवार को हराया था और मुंब्रा को ‘‘हरा रंग से रंगने’’ का संकल्प लिया था। हालांकि, बाद में उन्होंने अपनी इस टिप्पणी के लिए माफी मांग ली थी।
तहसीलदार उमेश पाटिल ने मामला दर्ज करने की सिफारिश चुनाव में हारी राकांपा उम्मीदवार सिद्दीकी फरहा शबाब अहमद की शिकायत पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें उन्होंने सहर के जाति प्रमाण पत्र की वैधता को चुनौती दी थी।
सब-डिवीजन अधिकारी (एसडीओ) को 25 मार्च को सौंपी गई रिपोर्ट में यह कहा गया है कि यूनुस शेख ने प्रथम दृष्टया राज्य निर्वाचन आयोग सहित चार सरकारी एजेंसियों को गुमराह किया।
रिपोर्ट में कहा गया कि यूनुस शेख का 2011 का ओबीसी प्रमाण पत्र आधिकारिक प्रारूप के अनुरूप नहीं था, उसमें एसडीओ के अनिवार्य हस्ताक्षर नहीं थे, और उसके शीर्षक से ‘‘महाराष्ट्र राज्य’’ शब्द गायब था।
अधिकारियों को जांच के दौरान जानकारी मिली कि शेख के पिता और चाचा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के निवासी थे। महाराष्ट्र जाति प्रमाण पत्र अधिनियम, 2000 के तहत, प्रवासियों को फॉर्म-10 प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य है। आरोप है कि शेख ने मूल निवासियों के लिए आरक्षित फॉर्म-8 के तहत प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए दस्तावेजों में हेरफेर किया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्होंने 2018 में अपने ‘‘प्रथम दृष्टया फर्जी’’ प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करके सहर शेख के लिए जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया था। हालांकि, परिवार ठाणे में रहता था, सहर का प्रमाण पत्र मुंबई नगर कलेक्टर कार्यालय से प्राप्त किया गया था।
तहसीलदार ने सभी ऐसे प्रमाणपत्रों को तत्काल रद्द करने तथा धोखाधड़ी और जालसाजी के लिए यूनुस शेख पर प्राथमिकी दर्ज करने की सिफारिश की।
भाषा धीरज सुभाष
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