ग्रामीण छात्रों की परेशानी समझने के लिए नेतागण अपने बच्चों को गांव के स्कूल में भेजें : दीपके

ग्रामीण छात्रों की परेशानी समझने के लिए नेतागण अपने बच्चों को गांव के स्कूल में भेजें : दीपके

ग्रामीण छात्रों की परेशानी समझने के लिए नेतागण अपने बच्चों को गांव के स्कूल में भेजें : दीपके
Modified Date: August 18, 2026 / 04:54 pm IST
Published Date: August 18, 2026 4:54 pm IST

हिंगोली (महाराष्ट्र), 18 अगस्त (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंगलवार को कहा कि मंत्रियों और नेताओं को कम से कम एक दिन अपने बच्चों को गांव के स्कूलों में भेजना चाहिए, ताकि वे उन ग्रामीण छात्रों की चुनौतियों को समझ सकें, जिन्हें शिक्षा हासिल करने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।

हिंगोली में स्कूल से जुड़े मुद्दों को लेकर आयोजित प्रदर्शन के दौरान दीपके ने ग्रामीण स्कूली बच्चों के लिए बुनियादी परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने में विफल रहने पर महाराष्ट्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि नेता चुनावी रैलियों के लिए बसों और ट्रेन का इंतजाम कर सकते हैं, लेकिन गरीब छात्रों के लिए एक बस तक उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं।

दीपके ने पिछले सप्ताह हिंगोली जिले में अपने पैतृक गांव से ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत की थी। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक दशक में राजनीतिक बहस ने लोगों को जाति और धर्म के आधार पर बांट दिया, जबकि शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं।

कॉजपा के संयोजक ने कहा कि दूरदराज के इलाकों में बच्चों को अक्सर स्कूल पहुंचने के लिए सात से 10 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है। उन्होंने कहा कि खासकर मानसून के दौरान सड़कों पर कीचड़ और जलभराव होने से बच्चों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।

दीपके ने संवाददाताओं से बातचीत में सवाल किया, ‘‘क्या ये मंत्री अपने बच्चों को ग्रामीण बच्चों की तरह पैदल स्कूल भेजेंगे?’’

उन्होंने कहा, ‘‘मंत्रियों, विधायकों और सांसदों को अपने बच्चों को एक दिन के लिए गांव के स्कूलों में भेजना चाहिए और उन्हें ग्रामीण बच्चों की तरह पैदल स्कूल जाने देना चाहिए। तब वे समझ पाएंगे कि इन बच्चों को किन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।’’

दीपके ने कहा कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, यह सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

उन्होंने आदिवासी एवं गरीब बच्चों के लिए अपनी लड़ाई जारी रखने का संकल्प जताया। दीपके ने कहा, ‘‘आदिवासी बच्चे का जीवन भी उतना ही अनमोल है, जितना किसी मंत्री के बच्चे के जीवन का है। उस बच्चे का जीवन किसी भी मायने में कम महत्वपूर्ण नहीं है।’’

आदिवासी आवासीय विद्यालयों में हाल में हुई छात्रों की मौतों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अमरावती के मेलघाट में एक छात्र की मौत हुई, जबकि गढ़चिरौली में भी छात्रों की जान गई।

दीपके ने कहा कि उन्होंने हिंगोली में प्रदर्शन करने का फैसला इसलिए किया, क्योंकि बचपन में उन्होंने अपने भाई-बहनों को खुद पैदल स्कूल जाते देखा था। उन्होंने कहा, ‘‘आज भी ग्रामीण इलाकों में लड़कियों को स्कूल जाने के लिए पैदल चलना पड़ता है। मेरी बहनें भी पैदल स्कूल जाती थीं। मैंने अपने भाइयों को भी पैदल स्कूल जाते देखा है। मैंने यह सब अपनी आंखों से देखा है।’’

दीपके ने आरोप लगाया, ‘‘15 साल बाद भी स्थिति नहीं बदली है। यह शर्मनाक है। नेता चुनावी रैलियों के लिए बसों और ट्रेनों का इंतजाम कर सकते हैं, लेकिन स्कूल जाने वाले गरीब बच्चों के लिए एक बस तक उपलब्ध नहीं करा सकते।’’

दीपके ने कहा कि उनका अभियान गांव के सरपंचों या निवासियों के खिलाफ नहीं है, बल्कि स्कूलों की स्थिति सुधारने में उन्हें भी शामिल किया जाना चाहिए।

उन्होंने नेताओं के बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं और गरीब, आदिवासी एवं श्रमिक वर्ग के बच्चों को उपलब्ध सुविधाओं के बीच असमानता की भी आलोचना की।

भाषा आशीष अविनाश

अविनाश


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