मुंबई, 15 जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बुधवार को परिसीमन का समर्थन करते हुए कहा कि उक्त प्रक्रिया बड़े निर्वाचन क्षेत्रों के लोगों को न्याय दिलाने और विकास का लाभ उन तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए जरूरी है।
शिंदे ने भरोसा जताया कि संसद के आगामी मानसून सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पारित हो जाएंगे।
शिंदे ने हाल में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) छोड़ उनके नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने वाले छह सांसदों के साथ दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की।
उन्होंने इस मुलाकात के बाद आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों की आबादी अब 20-25 लाख हो गई है, जिससे सांसदों के लिए विकास संबंधी जरूरतों को प्रभावी ढंग से पूरा करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।
शिंदे ने कहा, “परिसीमन जरूरी है, ताकि बड़े निर्वाचन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को न्याय मिल सके और विकास का लाभ उन तक प्रभावी ढंग से पहुंचे।”
महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन करते हुए शिवसेना प्रमुख ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस विधेयक को पेश करने का साहस दिखाया है, जो लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने संसद के पिछले सत्र में इस विधेयक को रोका था, लेकिन अब सभी दलों को आगामी सत्र में इसका समर्थन करना चाहिए।
साल 2029 में संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 तक किए जाने के प्रावधान वाला संविधान संशोधन विधेयक 17 अप्रैल को लोकसभा में पारित नहीं हो सका था। इस विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे।
शाह के साथ अपनी मुलाकात के बारे में शिंदे ने कहा कि बातचीत उन निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े विकास कार्यों पर केंद्रित थी, जिनका प्रतिनिधित्व करने वाले सांसद शिवसेना (उबाठा) छोड़कर उनकी पार्टी में शामिल हो गए थे। इनमें मराठवाड़ा में सिंचाई परियोजनाओं, रेलवे और सड़क अवसंरचना, प्रधानमंत्री आवास योजना, शहरी विकास, ग्रामीण विकास और अन्य लंबित प्रस्ताव शामिल हैं।
शिंदे के मुताबिक, शाह ने उन्हें भरोसा दिलाया कि इन प्रस्तावों पर केंद्रीय मंत्रिमंडल की अगली बैठक में चर्चा की जाएगी।
शिंदे के अनुसार, शाह ने शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे को पार्टी सांसदों की ओर से उठाए गए मुद्दों पर आगे की कार्रवाई के लिए समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी है।
विरोधी गुट से शिवसेना में शामिल हुए छह सांसदों का जिक्र करते हुए शिंदे ने कहा कि पार्टी में उनके विलय से जुड़ी सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और यह मामला आवश्यक कार्रवाई के लिए लोकसभा अध्यक्ष के पास है। उन्होंने उम्मीद जताई कि लोकसभा अध्यक्ष इस संबंध में उचित फैसला लेंगे।
भाषा पारुल वैभव
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