शिवसेना (उबाठा) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पारित न होने पर दुख जताया
शिवसेना (उबाठा) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पारित न होने पर दुख जताया
मुंबई, 17 अप्रैल (भाषा) शिवसेना (उबाठा) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने शुक्रवार को अपनी पार्टी के रुख से अलग हटकर लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के पारित न होने पर अफसोस जताया और इसे उन महिलाओं के लिए “दुखद दिन” बताया, जो संसद या विधानसभाओं में खुद को देखने की उम्मीद कर रही थीं।
विधायिकाओं में 2029 में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने और लोकसभा की सीट की संख्या बढ़ाने वाला संविधान संशोधन विधेयक, शुक्रवार को निचले सदन (लोकसभा) में पारित नहीं हो सका। कुल उपस्थित 528 सदस्यों में से 298 ने इसके पक्ष में और 230 ने विरोध में मतदान किया, जबकि इसे पारित होने के लिए 352 मतों की आवश्यकता थी।
चतुर्वेदी ने ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत की उन महिलाओं के लिए दुखद दिन है, जो संसद या विधानसभा में खुद को देखना चाहती थीं।”
एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा, “महिला आरक्षण पर मेरा स्पष्ट रुख रहा है और मैं इसे आगे भी व्यक्त करती रहूंगी।” चतुर्वेदी का राज्यसभा सदस्य के तौर पर कार्यकाल इसी महीने समाप्त हुआ था।
संविधान संशोधन विधेयक के अनुसार, वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया के बाद 2029 के आम चुनाव से पहले महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए लोकसभा सीट की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक किए जाने का प्रस्ताव था।
इससे एक दिन पहले, शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने केंद्र से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले 2023 के कानून को तत्काल लागू करने और परिसीमन की प्रक्रिया को स्थगित रखने की मांग की थी।
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने एक संक्षिप्त बयान में कहा था कि परिसीमन यानी निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण किसी एक दल के राजनीतिक भविष्य का नहीं, बल्कि देश के भविष्य का विषय है।
भाषा राखी दिलीप
दिलीप

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