शिवसेना विधायक की पुस्तक प्रकाशक के खिलाफ टिप्पणी उनकी ‘आपराधिक मानसिकता’ को दर्शाती है: सपकाल

शिवसेना विधायक की पुस्तक प्रकाशक के खिलाफ टिप्पणी उनकी ‘आपराधिक मानसिकता’ को दर्शाती है: सपकाल

शिवसेना विधायक की पुस्तक प्रकाशक के खिलाफ टिप्पणी उनकी ‘आपराधिक मानसिकता’ को दर्शाती है: सपकाल
Modified Date: April 24, 2026 / 09:34 pm IST
Published Date: April 24, 2026 9:34 pm IST

मुंबई, 24 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने शुक्रवार को कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज से संबंधित एक पुस्तक को लेकर प्रकाशक के खिलाफ शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ की टिप्पणी उनकी ‘‘आपराधिक मानसिकता’’ को दर्शाती है। उन्होंने पूछा कि सरकार ने अब तक उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की है।

सोशल मीडिया पर एक ऑडियो क्लिप आने के बाद विवाद खड़ा हो गया, जिसमें गायकवाड़ को कोल्हापुर के प्रकाशक प्रशांत आंबी के खिलाफ कथित तौर पर अभद्र भाषा का प्रयोग करते और धमकी देते हुए सुना जा सकता है। विधायक भाकपा नेता गोविंद पानसरे द्वारा लिखित और मूल रूप से 1988 में प्रकाशित पुस्तक ‘शिवाजी कोण होता’ का जिक्र कर रहे थे।

आंबी के अनुसार, विधायक ने उन्हें फोन किया और किताब के शीर्षक पर आपत्ति जताई। उन्होंने दावा किया कि फोन पर गायकवाड़ ने उनकी जीभ काटने, उनके घर में घुसकर उन पर हमला करने की धमकी दी और कहा, ‘‘तुम भी पानसरे से मिलोगे।’’

पानसरे की 2015 में कोल्हापुर में सुबह की सैर के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

सपकाल ने यहां पत्रकारों के साथ बातचीत में दावा किया कि गायकवाड़ ने प्रकाशक के खिलाफ ‘‘अभद्र भाषा’’ का इस्तेमाल किया और पानसरे की हत्या का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि गायकवाड़ की टिप्पणी उनकी ‘‘आपराधिक मानसिकता’’ को दर्शाती है।

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि यह पुस्तक एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, लेकिन इसके बारे में बात करते हुए गायकवाड़ की टिप्पणी छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रति अनादर के समान है।

उन्होंने सरकार से पूछा कि गायकवाड़ के खिलाफ अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई है।

ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी को अनिवार्य बनाने के मुद्दे पर, सपकाल ने कहा कि भाषा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, लेकिन उन्होंने अनिवार्यता का विरोध करते हुए इसे ध्रुवीकरण का प्रयास बताया।

इस महीने की शुरुआत में, महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने घोषणा की थी कि एक मई से ऑटो चालकों के लिए मराठी बोलना अनिवार्य होगा तथा महाराष्ट्र के सभी 59 क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) इस नियम को लागू करवाने के लिए एक विशेष अभियान चलाएंगे।

भाषा नेत्रपाल पवनेश

पवनेश


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