शिवसेना सांसद संजय पाटिल ने पत्रकारों को धमकाया; बाद में खेद जताया

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शिवसेना सांसद संजय पाटिल ने पत्रकारों को धमकाया; बाद में खेद जताया

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  • Publish Date - June 25, 2026 / 11:09 PM IST,
    Updated On - June 25, 2026 / 11:09 PM IST

मुंबई, 25 जून (भाषा) हाल में शिवसेना में शामिल हुए लोकसभा सदस्य संजय दीना पाटिल के बृहस्पतिवार को पत्रकारों के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने और उन्हें धमकी देने के बाद विवाद खड़ा हो गया। तीखी आलोचना और मीडिया के बहिष्कार का सामना करने के बाद पाटिल ने बाद में अपने व्यवहार पर खेद जताया।

मुंबई उत्तर-पूर्व से सांसद पाटिल उन छह शिवसेना (उद्धव बालासाहेब) सांसदों में शामिल हैं, जो हाल में शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना से जुड़ गए।

टिप्पणी से राजनीतिक विवाद खड़ा होने के बाद शिवसेना प्रमुख और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए पाटिल से खेद व्यक्त करने को कहा, जिसके बाद उन्होंने (पाटिल) अपनी टिप्पणी पर अफसोस जताया।

पाटिल की ओर से अभद्र भाषा के इस्तेमाल और धमकियों के विरोध में मीडिया ने उनके खिलाफ पूर्ण बहिष्कार का फैसला किया। इसके चलते शाम को बालासाहेब भवन स्थित शिवसेना कार्यालय में आयोजित उनकी प्रेस वार्ता में पत्रकार शामिल नहीं हुए। यह प्रेस वार्ता पाटिल ने पार्टी प्रमुख शिंदे के निर्देश पर अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए बुलाई थी।

बागी सांसदों के खिलाफ ‘ऑपरेशन तुड़वा’ अभियान को लेकर पाटिल का पहले से ही शिवसेना (उबाठा) के राज्यसभा सदस्य संजय राउत के साथ टकराव चल रहा था। बृहस्पतिवार को पाटिल तब आपा खो बैठे, जब पत्रकारों ने उनसे “प्रदर्शनकारियों पर बम फेंकने” वाले उनके जवाबी दावे के बारे में सवाल किया।

पत्रकारों ने पाटिल से यह भी पूछा कि उनके पाला बदलने के बावजूद उनकी बेटी और पार्षद राजुल पाटिल ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) के साथ ही बने रहने का फैसला क्यों किया।

इस सवाल पर पाटिल भड़क गए और चिल्लाते हुए कहा, “तुम मेरे मामलों में क्यों दखल दे रहे हो? अगर तुम दोबारा आए, तो मैं तुम्हें मार डालूंगा।”

पाटिल के पाला बदलने के बाद से ही उनके और राउत के बीच तीखी बहस होती रही है। सोमवार रात शिवसेना में शामिल होने के कुछ घंटों बाद पाटिल ने समाचार चैनल को बताया कि जब उनके पिता और कांग्रेस के दिवंगत विधायक दीना बामा पाटिल पर हमला हुआ था, तो “लोग मारे गए थे।” हालांकि, उन्होंने इस बारे में कोई और जानकारी नहीं दी।

बृहस्पतिवार को पाटिल ने साफ किया कि यह घटना उनके जन्म से पहले हुई थी।

मीडिया के बहिष्कार के बाद पाटिल ने पत्रकारों के साथ हुई अपनी बहस पर अफसोस जाहिर किया।

उन्होंने कहा, “जब से मैं शिवसेना में शामिल हुआ हूं, मुझे लगातार अपमानित होना पड़ा है। जब आज सुबह पत्रकार दोस्त फिर आए, तो मैंने हाथ जोड़कर उनसे गुजारिश की कि वे इस मुद्दे पर मुझसे कोई और सवाल न पूछें।”

पाटिल ने कहा, “हालांकि, जब वही सवाल बार-बार पूछा गया, तो स्थिति बिगड़ गई। उस समय की गहमागहमी और उलझन में, मैंने अनजाने में गलत शब्दों का इस्तेमाल कर दिया। इसके लिए मैं सभी पत्रकार भाइयों और बहनों से ईमानदारी से खेद व्यक्त करता हूं।”

पाटिल ने कहा कि उन्हें राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों या किसी और की ओर से की जाने वाली अपनी आलोचना से कोई आपत्ति नहीं है।

इससे पहले, राउत ने मुंबई के पुलिस आयुक्त देवेन भारती को पत्र लिखकर पाटिल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पाटिल ने कथित तौर पर कहा था कि अगर कोई (पार्टी बदलने के) उनका विरोध करता है, तो वह उन पर “बम फेंकेंगे”, उनके घरों में घुसेंगे और “उन्हें मार डालेंगे।”

हालांकि, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि पुलिस धमकी देने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ उचित कार्रवाई करेगी।

भाषा आशीष पारुल

पारुल