मुंबई, 25 जून (भाषा) महाराष्ट्र विधानसभा के पीठासीन अधिकारी राजू खरे ने सरकार को पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का बृहस्पतिवार को निर्देश दिया।
पुलिस ने मंगलवार को बताया कि 26 वर्षीय अग्रवाल की मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने 18 जून को पुणे में लोहागढ़ किले के निकट एक घाटी में उन्हें कथित तौर पर धक्का दे दिया था। सिया गोयल (20) और चौधरी (22) को गिरफ्तार कर लिया गया है।
अग्रवाल और गोयल की शादी नवंबर में राजस्थान के उदयपुर स्थित एक महल में होने वाली थी।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) सदस्य सुनील शेलके ने राज्य विधानसभा में यह मुद्दा उठाया और मांग की कि हत्या के मामले में गोयल के परिवार को भी आरोपी बनाया जाये।
उन्होंने दावा किया कि गोयल परिवार ने अग्रवाल परिवार से उसके (सिया) किसी अन्य व्यक्ति के साथ संबंध होने की जानकारी छिपाई थी और कहा कि हत्या का मुकदमा त्वरित अदालत में चलाया जाना चाहिए।
खरे ने सरकार को हत्या की जांच के लिए एक एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया।
शेलके ने राज्य सरकार से पीड़ित के परिवार को न्याय सुनिश्चित करने की अपील की।
विधायक ने कहा कि केतन अग्रवाल के परिवार को शुरुआत में बताया गया था कि उसकी मौत एक हादसे में हुई है। हालांकि, पुलिस की विस्तृत जांच में बाद में यह सामने आया कि यह हत्या का मामला था।
उन्होंने पुणे ग्रामीण पुलिस अधीक्षक और जांच टीम के प्रयासों की सराहना की और कहा कि उन्होंने गहन जांच की, साक्ष्य एकत्र किये और गवाहों के बयान दर्ज किए, जिससे मामले की सच्चाई सामने आ सकी।
उन्होंने कहा, ‘‘जिसे शुरुआत में एक हादसा बताया गया था, वह विस्तृत पुलिस जांच के बाद हत्या का मामला निकला।’’
उन्होंने आरोपियों सिया गोयल और उसके प्रेमी के बीच कथित संबंधों का भी उल्लेख किया और दावा किया कि जांच के दौरान फोन कॉल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य सामने आए हैं।
शेलके ने अधिकारियों से मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच करने की अपील की और मांग की कि इस मामले की सुनवाई त्वरित अदालत में की जाए।
उन्होंने कहा, ‘‘यदि केतन अग्रवाल और उनके परिवार को न्याय दिलाना है, तो राज्य सरकार को इस मामले का उचित संज्ञान लेना चाहिए और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।’’
विधायक ने सरकार से अपील की कि वह मामले पर करीबी नजर रखे और यह सुनिश्चित करे कि दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाए।
हालांकि, विपक्षी दल शिवसेना (उबाठा) के सदस्य भास्कर जाधव ने सवाल किया कि क्या पीठासीन अधिकारी का यह निर्देश सरकार पर बाध्यकारी है।
उन्होंने पहले के उन उदाहरणों का हवाला दिया, जिनमें विधान परिषद के उपसभापति के निर्णय को मुख्यमंत्री ने पलट दिया था। उन्होंने दावा कयिा कि विधानसभा के पीठासीन अधिकारी का निर्णय भी लागू नहीं किया गया था।
भाजपा सदस्य सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि विधान परिषद और विधानसभा के नियम अलग-अलग हैं।
भाषा देवेंद्र रंजन
रंजन