शिवसेना (उबाठा) में टूट के संकेत, राउत का दावा- महाराष्ट्र में सांसदों को खरीदने के लिए 15 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान

शिवसेना (उबाठा) में टूट के संकेत, राउत का दावा- महाराष्ट्र में सांसदों को खरीदने के लिए 15 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान

शिवसेना (उबाठा) में टूट के संकेत, राउत का दावा- महाराष्ट्र में सांसदों को खरीदने के लिए 15 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान
Modified Date: June 17, 2026 / 12:53 am IST
Published Date: June 17, 2026 12:53 am IST

मुंबई/नयी दिल्ली, 16 जून (भाषा) शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता संजय राउत ने मंगलवार देर रात दावा किया कि ‘‘महाराष्ट्र के सांसदों को खरीदने’’ के लिए ‘‘15 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि’’ दी जा रही है। उनके इस बयान से पार्टी के कुछ लोकसभा सदस्यों के पाला बदलने की अटकलों को और बल मिला है।

इससे पहले, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) के सांसदों के संभावित विद्रोह (संभवतः तृणमूल कांग्रेस की तर्ज पर) की अटकलें तब और तेज हो गईं, जब सत्तारूढ़ शिवसेना के नेता प्रताप सरनाइक ने संकेत दिया कि बागी सांसदों का स्वागत किया जाएगा और पाला बदलने पर उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।

इस बीच चर्चाएं तब शुरू हुईं जब राउत दिल्ली पहुंचे। शिवसेना (उबाठा) नेता को उद्धव ठाकरे का करीबी माना जाता है। इससे यह अटकलें लगाई जाने लगीं कि वह पार्टी के नौ सांसदों द्वारा अलग समूह बनाने की किसी संभावित कोशिश को रोकने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सकते हैं।

सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर देर रात किए गए एक पोस्ट में राउत ने कहा, ‘‘अपना सपना मनी…मनी! खबर है कि महाराष्ट्र के सांसदों को खरीदने के लिए आज रात 15 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि दी जाएगी। यह चौंकाने वाला और शर्मनाक है!’’

इससे पहले राउत और उनकी पार्टी शिवसेना (उबाठा) के सहयोगी और लोकसभा सदस्य अनिल देसाई ने इस बात को खारिज कर दिया था कि कुछ सांसद अलग गुट बना सकते हैं।

सांसदों के बीच बगावत की चर्चाओं के बीच शिवसेना नेता और राज्य के परिवहन मंत्री सरनाइक ने इशारों-इशारों में बागी सांसदों को एक तरह का न्योता दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर सांसद और विधायक जैसे जन-प्रतिनिधियों को अपने नेतृत्व पर भरोसा नहीं है… अगर वे शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के आदर्शों में विश्वास करते हैं और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व पर भरोसा करने को तैयार हैं, तो शिवसेना के दरवाजे उनके लिए खुले हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगर वे भविष्य में कभी ऐसा सोचते हैं, तो हम उन्हें प्राथमिकता देंगे।’’

उनकी यह टिप्पणी शिवसेना (उबाठा) सांसद संजय देशमुख की दिल्ली में केंद्रीय मंत्री और शिवसेना नेता प्रतापराव जाधव से मुलाकात के एक दिन बाद आई।

यवतमाल-वाशिम से सांसद के रविवार को मुंबई में उद्धव ठाकरे के आवास पर बुलाई गई बैठक में ‘‘पारिवारिक कारणों’’ का हवाला देकर शामिल नहीं होने पर लोगों को हैरानी हुई। हालांकि, सोमवार को उन्होंने प्रतापराव जाधव से मुलाकात की जिससे उनके पाला बदलने की अटकलें तेज हो गईं।

शिवसेना (उबाठा) के नौ में से केवल चार सांसदों के बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने के बाद पाला बदलने की संभावनाओं को और बल मिला। राउत ने दावा किया था कि पांच अन्य सांसद डिजिटल माध्यम से और फोन पर बैठक में शामिल हुए थे।

मंगलवार को राउत ने कहा कि ‘‘गलत तस्वीर पेश की जा रही है’’ और जोर देकर कहा कि सभी सांसद मजबूती से पार्टी और उद्धव ठाकरे के साथ हैं।

सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और संजय पाटिल ने जहां बैठक में व्यक्तिगत रूप से हिस्सा लिया, वहीं ओमप्रकाश राजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश बापूराव पाटिल अष्टिकर और संजय देशमुख ऑनलाइन शामिल हुए। राउत ने बताया कि एक और सांसद, संजय जाधव ने ठाकरे से फोन पर बात की।

उन्होंने कहा कि सांसदों ने अपनी मां, बच्चों, साईं बाबा और देवी तुलजाभवानी की शपथ खाकर कहा कि वे पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे का साथ नहीं छोड़ेंगे।

राज्यसभा सदस्य ने नयी दिल्ली में संसद भवन परिसर में पत्रकारों से कहा, ‘‘शिवसेना (उबाठा) के सभी सांसद एकजुट हैं और एकजुट रहेंगे।’’

शिवसेना (उबाठा) के लिए किसी भी खतरे की बात को खारिज करते हुए राउत ने किसी भी संकट से निपटने की पार्टी की क्षमता पर भी भरोसा जताया।

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह इस चर्चा के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलने के लिए दिल्ली आए हैं कि शिवसेना (उबाठा) के कुछ सांसद तृणमूल कांग्रेस के नेताओं की तरह अलग समूह बना सकते हैं, तो राउत ने ऐसी किसी भी संभावना से इनकार किया।

राउत ने कहा कि उनकी पार्टी की 60 साल पुरानी विरासत है और उसका अलग-अलग मुद्दों को लेकर आंदोलन करने का इतिहास रहा है।

उन्होंने कहा, “हमने अतीत में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। लेकिन हमारी पार्टी कार्यकर्ता-आधारित पार्टी है। विधायक और सांसद आते-जाते हैं, लेकिन पार्टी बनी रहती है। हमारा दिन जब आएगा, हम दिखाएंगे पार्टी कैसे तोड़ी जाती है।”

उन्होंने पार्टियों को तोड़ने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर आरोप लगाया और कहा कि ऐसी प्रथा ‘देश की राजनीतिक सेहत के लिए बुरी’ है।

वहीं, सूत्रों के अनुसार, शिवसेना (उबाठा) के नौ लोकसभा सांसदों में से “छह से सात” सांसद सत्तारूढ़ शिवसेना में शामिल होने के इच्छुक हैं और फिलहाल राष्ट्रीय राजधानी में डेरा डाले हुए हैं।

सूत्रों का यह भी कहना है कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे भी मंगलवार देर रात दिल्ली पहुंचने वाले थे।

शिंदे गुट के एक नेता ने दावा किया कि “छह से सात सांसद पाला बदल सकते हैं।”

नेता ने दावा किया कि जिन सांसदों के पाला बदलने की चर्चा है, वे पार्टी में आदित्य ठाकरे को और अधिक महत्व दिए जाने की संभावना से असहज हैं।

भाषा सुरभि प्रशांत

प्रशांत


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