बड़ी कक्षाओं में पहुंचते ही गिर जाता है विद्यार्थियों का मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य : अध्ययन

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बड़ी कक्षाओं में पहुंचते ही गिर जाता है विद्यार्थियों का मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य : अध्ययन

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  • Publish Date - August 21, 2026 / 04:43 PM IST,
    Updated On - August 21, 2026 / 04:43 PM IST

मुंबई, 21 अगस्त (भाषा) देश भर में छात्र एवं छात्राओं की खुशहाली और सेहत आठवीं कक्षा के 62 प्रतिशत से घटकर 12वीं कक्षा में 43 प्रतिशत रह जाता है। 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों में चिंता, कम ऊर्जा, निराशा, अकेलापन और उदासी का स्तर सबसे अधिक पाया गया है। ‘स्टूडेंट वेलबीइंग पल्स रिपोर्ट 2026’ में यह जानकारी सामने आई है।

आईसी3 इंस्टीट्यूट की इस रिपोर्ट के अनुसार, विद्यार्थियों की खुशी 65 प्रतिशत से घटकर 48 प्रतिशत, आत्मविश्वास 64 से 47 प्रतिशत और प्रेरणा 64 से 49 प्रतिशत रह जाती है। यह अध्ययन 8,515 विद्यार्थियों की प्रतिक्रियाओं पर आधारित है।

लड़कियों में लड़कों की तुलना में चिंता और कम आत्मविश्वास अधिक पाया गया। लड़कों के 64 प्रतिशत की तुलना में केवल 52 प्रतिशत लड़कियों ने अक्सर या हमेशा आत्मविश्वास महसूस करने की बात कही, जबकि करियर संबंधी चिंता लड़कों के 31 प्रतिशत के मुकाबले लड़कियों में 35 प्रतिशत रही।

रिपोर्ट के मुताबिक, मदद मांगने वाले छात्र सबसे अधिक दोस्तों (49 प्रतिशत) और परिवार (44 प्रतिशत) का सहारा लेते हैं जबकि केवल छह प्रतिशत छात्र स्कूल के औपचारिक परामर्शदाताओं से संपर्क करते हैं, हालांकि 52 प्रतिशत छात्रों का मानना है कि थेरेपी या परामर्श मददगार होगा। वहीं, केवल 52 प्रतिशत छात्रों ने व्यवस्थित करियर काउंसलिंग मिलने की बात कही, जबकि 33 प्रतिशत को स्पष्ट करियर मार्गदर्शन न मिलने की चिंता है। बिहार में यह चिंता 43 प्रतिशत छात्रों में पाई गई।

इसमें कहा गया है कि 55 प्रतिशत छात्र रात में छह घंटे या उससे कम सोते हैं, जिसका प्रमुख कारण पढ़ाई का दबाव, ज्यादा सोचना और स्क्रीन का इस्तेमाल है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि तनाव कम करने के लिए 69 प्रतिशत छात्र संगीत और 57 प्रतिशत शारीरिक गतिविधि का सहारा लेते हैं।

आईसी3 के संस्थापक गणेश कोहली ने कहा कि उच्च कक्षाओं में पढ़ाई और करियर संबंधी फैसलों का दबाव बढ़ने के साथ छात्रों के कल्याण और सकारात्मक भावनाओं में गिरावट आती है, इसलिए उन्हें शुरुआती स्तर पर ही सही मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है।

भाषा प्रशांत रंजन

रंजन