ठाणे, 19 जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र के ठाणे जिले में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने 2018 में हिट-एंड-रन की घटना में स्थायी रूप से दिव्यांग हो गए एक व्यक्ति को 14 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
न्यायाधिकरण की सदस्य रूपाली वी मोहिते ने शनिवार को बीमा कंपनी रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को दावेदार नितेश सुधीर भाटकर को मुआवजे के साथ-साथ नौ प्रतिशत प्रति वर्ष ब्याज देने का आदेश दिया।
न्यायाधिकरण ने ‘भुगतान करो और वसूल करो’ सिद्धांत को लागू करते हुए बीमाकर्ता को पहले दावे का भुगतान करने और बाद में पॉलिसी की शर्तों के उल्लंघन के कारण दुर्घटना में शामिल वाहन के मालिक से राशि वसूल करने का निर्देश दिया।
यह दुर्घटना 12 फरवरी, 2018 की रात को हुई, जब शिकायतकर्ता, जो उस समय 22 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र था, उत्तन नाका रोड की तरफ मोटरसाइकिल पर पीछे बैठकर जा रहा था। विपरीत दिशा से आ रहे एक अन्य तेज रफ्तार दोपहिया वाहन ने स्पीड ब्रेकर को पार कर उसे सामने से टक्कर मार दी।
इस टक्कर के परिणामस्वरूप पीड़ित के पैर की कई हड्डियां टूट गयीं और अंततः उसके दाहिने पैर के अंगूठे को काटना पड़ा।
भारतीय दंड संहिता और मोटर वाहन अधिनियम के तहत दोषी वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
हालांकि, याचिकाकर्ता ने 49 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता साबित करने की कोशिश की, लेकिन न्यायाधिकरण ने इसे घटाकर 30 प्रतिशत कार्यात्मक दिव्यांगता बताया।
एमएसीटी सदस्य मोहिते ने टिप्पणी की, ‘किसी व्यक्ति के पूरे शरीर के संदर्भ में स्थायी विकलांगता का प्रतिशत, कमाई की क्षमता में होने वाली हानि के प्रतिशत के बराबर नहीं माना जा सकता।’
न्यायाधिकरण ने यह भी पाया कि दुर्घटना के समय दोषी वाहन के चालक के पास वैध और प्रभावी ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था, जिससे बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन हुआ।
न्यायाधिकरण ने कुल 14,09,871 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया, जिसमें भविष्य की आय के नुकसान के लिए 6.48 लाख रुपये, भविष्य की संभावनाओं के लिए 2.59 लाख रुपये और अस्पताल तथा चिकित्सा खर्चों के लिए 3.62 लाख रुपये शामिल हैं।
भाषा तान्या वैभव
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