राकांपा में कोई फूट नहीं, सच्चिदानंद सिंह के पत्र का कोई महत्व नहीं : प्रफुल्ल पटेल

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राकांपा में कोई फूट नहीं, सच्चिदानंद सिंह के पत्र का कोई महत्व नहीं : प्रफुल्ल पटेल

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  • Publish Date - July 14, 2026 / 03:31 PM IST,
    Updated On - July 14, 2026 / 03:31 PM IST

मुंबई, 14 जुलाई (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने मंगलवार को कहा कि पार्टी में किसी तरह की कोई फूट नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि सुनेत्रा पवार के पार्टी अध्यक्ष चुने जाने को चुनौती देने वाले पार्टी के राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह के पत्र का कोई महत्व नहीं है। सच्चिदानंद सिंह ने दावा किया कि इस साल 26 फरवरी को सुनेत्रा पवार का पार्टी अध्यक्ष चुना जाना असंवैधानिक था और इसलिए इसे ‘अमान्य’ घोषित किया जाना चाहिए।

सिंह की ओर से दिल्ली की एक विधि फर्म ने नौ जुलाई को कानूनी नोटिस जारी किया था।

पटेल ने इस नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “पार्टी में कोई फूट नहीं है। सभी वरिष्ठ नेता राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा के लिए सुनेत्रा पवार से मिलते हैं। सच्चिदानंद सिंह के पत्र का कोई महत्व नहीं है। पार्टी के हित में किसी भी मुद्दे का समाधान आपसी सहमति से किया जाना चाहिए।”

महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री एवं राकांपा अध्यक्ष सुनेत्रा पवार, प्रफुल्ल पटेल और पार्टी के महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव को भेजे गए इस कानूनी नोटिस में आरोप लगाया गया कि पार्टी संविधान के अनिवार्य प्रावधानों का पालन किए बिना और प्रतिनिधियों व पदाधिकारियों को विधिवत सूचना दिए बिना अध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया शुरू की गई।

नोटिस के अनुसार, तत्कालीन राकांपा अध्यक्ष अजित पवार के 28 जनवरी को निधन के बाद पार्टी ने निर्वाचन आयोग को सूचित किया था कि नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव तक प्रफुल्ल पटेल कार्यवाहक राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी निभाएंगे। नोटिस में यह भी आरोप लगाया गया कि बृजमोहन श्रीवास्तव ने संवैधानिक अधिकार नहीं होने के बावजूद राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाया और अध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी।

नोटिस में दावा किया गया, “पार्टी संविधान के अनुसार न तो विधिवत केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण का गठन किया गया, न ही निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया गया और न ही चुनाव कार्यक्रम घोषित किया गया। प्रतिनिधियों को उम्मीदवारों का नामांकन करने, चुनाव लड़ने या मतदान करने का अवसर भी नहीं दिया गया।”

सच्चिदानंद सिंह ने इस वर्ष 28 फरवरी, 10 मार्च और 29 अप्रैल को निर्वाचन आयोग को भेजे गए पार्टी के उन पत्रों को वापस लेने की मांग की, जिनमें अध्यक्ष पद के चुनाव और पदाधिकारियों का ब्योरा दर्ज है।

उन्होंने किसी स्वतंत्र चुनाव प्राधिकरण की निगरानी में पार्टी का संगठनात्मक चुनाव नए सिरे से कराने की भी मांग की।

भाषा जितेंद्र दिलीप

दिलीप