‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई चीज़ नहीं होती, साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत संपर्क करें: फडणवीस
'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई चीज़ नहीं होती, साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत संपर्क करें: फडणवीस
मुंबई, 26 अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को कहा कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई चीज नहीं होती और पुलिस या सीबीआई अधिकारी बनकर वीडियो कॉल करने वाले व्यक्ति से लोगों को घबराना नहीं चाहिए।
उन्होंने कहा कि साइबर धोखाधड़ी के मामलों में तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर सूचना देनी चाहिए, क्योंकि ठगी की रकम वापस मिलने की संभावना इस बात पर निर्भर करती है कि इसकी सूचना कितनी जल्द दी जाती है।
गृह विभाग का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे फडणवीस ने राज्य पुलिस की साइबर इकाई द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में ‘डिजिटल अरेस्ट’ नामक एक लघु फिल्म तथा ‘साइबर एंथम’ (साइबर जागरूकता गान) जारी किया।
उन्होंने कहा, ‘डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज़ नहीं होती।’ उन्होंने यह भी बताया कि साइबर ठगी के तुरंत बाद का समय, जिसे शुरूआती महत्वपूर्ण घंटे कहा जाता है, पैसे वापस पाने के लिए बहुत जरूरी होता है।
उन्होंने कहा, ‘अगर इस दौरान शिकायत की जाती है, तो रकम को (अंतरित किये जाने या निकासी से) रोकने या उसे वापस पाने की संभावना ज़्यादा होती है।’
फडणवीस ने कहा कि देरी होने पर पैसे वापस पाना बहुत मुश्किल हो जाता है क्योंकि पैसे अक्सर कई बैंक खातों के जरिए हस्तांतरित किए जाते हैं।
उन्होंन कहा, ‘इसलिए, जैसे ही आपको पता चले कि आपके साथ धोखाधड़ी हुई है, 1930 पर संपर्क करें।’
महाराष्ट्र साइबर के प्रमुख यशस्वी यादव ने प्रस्तावित ‘महाराष्ट्र साइबर सेफ ऐप’ और ‘आशा कॉल बॉट’ परियोजना पर प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम में फिल्म और ‘साइबर एंथम’ में योगदान देने वाले अभिनेता आशीष विद्यार्थी, पंकज त्रिपाठी, शरद केलकर, सोनाली बेंद्रे, जावेद जाफरी और मंगेश देसाई, गायिका सुनिधि चौहान तथा यूट्यूबर समय रैना को सम्मानित किया गया।
राज्य मंत्री डॉ. पंकज भोयर, पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते, गृह विभाग की अपर मुख्य सचिव मनीषा म्हैसकर और अन्य वरिष्ठ सरकारी एवं पुलिस अधिकारी भी कार्यक्रम में मौजूद थे।
भाषा
राखी सुभाष
सुभाष

Facebook


