पवई में अतिक्रमण हटाने में बीएमसी की विफलता पर उच्च न्यायालय ने कहा, ‘यह एक कमजोर बहाना है’

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पवई में अतिक्रमण हटाने में बीएमसी की विफलता पर उच्च न्यायालय ने कहा, ‘यह एक कमजोर बहाना है’

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  • Publish Date - February 13, 2026 / 06:15 PM IST,
    Updated On - February 13, 2026 / 06:15 PM IST

मुंबई, 13 फरवरी (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उपनगरीय पवई की एक सड़क से अतिक्रमण नहीं हटाने के लिए बीएमसी के ‘कमजोर बहाने’ की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि सड़क को निजी संपत्ति बताने का बीएमसी का दावा ‘अपनी शक्तियों का पूर्ण परित्याग’ है।

न्यायमूर्ति रविंद्र घुगे और न्यायमूर्ति अभय मंत्री की पीठ ने कहा कि बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) अपने वैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए बाध्य है और अतिक्रमणकारियों को खुश करने के लिए इस तरह से कार्य नहीं कर सकता।

पीठ ने नगर आयुक्त को उस सड़क से अतिक्रमण हटाने की योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, जिसे बीएमसी ने निजी संपत्ति बताया था।

पीठ ‘ब्यूमोंट एचएफएसआई स्कूल’ और उसकी प्रधानाध्यापिका कल्याणी पटनायक द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें बीएमसी पर कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही का आरोप लगाया गया था।

याचिका में कहा गया था कि संस्थान के पास सड़क पर अतिक्रमण करने वाले झुग्गीवासियों को हटाने के बजाय नगर निगम ने उन्हें शौचालय और पानी उपलब्ध कराकर उनकी सहायता की।

अदालत ने कहा कि बीएमसी का यह रुख कि वह कोई कार्रवाई शुरू नहीं कर सकती, क्योंकि सड़क निजी संपत्ति है, एक ‘कमजोर बहाना’ है और यह दर्शाता है कि नगर निकाय के पास ‘समस्या से निपटने की इच्छा, लगन, साहस या साधन’ नहीं है।

पीठ ने कहा, ‘‘हम बीएमसी के रुख से हैरान हैं, जो वाकई चौंकाने वाला है। बीएमसी का यह रुख अतिक्रमणकारियों को वह क्षेत्र सौंपने के बराबर है।’’

नगर निकाय ने शुक्रवार को अपने हलफनामे में कहा कि सड़क का उपयोग भले ही जनता द्वारा किया जाता है, लेकिन वह निजी संपत्ति है और इसलिए कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती।

पीठ ने बीएमसी प्रमुख को 10 दिनों के भीतर अतिक्रमणकारियों को हटाने की योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया और कहा कि योजना केवल दिखावा नहीं होनी चाहिए।

पीठ ने निगम को आदेश दिया कि वह सड़क पर उपलब्ध कराई गई मोबाइल शौचालय सुविधा को 48 घंटे में हटाए।

भाषा संतोष दिलीप

दिलीप