मुंबई, 30 जून (भाषा) शिवसेना (उबाठा) नेता आदित्य ठाकरे ने मंगलवार को कहा कि पार्टी के विधान परिषद सदस्य सचिन अहीर के सत्तारूढ़ ‘महायुति’ में शामिल होने के फैसले का कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी नेताओं को तोड़ने की कथित कोशिश “ऑपरेशन टाइगर” नहीं, बल्कि “ऑपरेशन देवेंद्र फडणवीस” है।
उन्होंने विस्तार से जानकारी नहीं दी, लेकिन कहा कि इस ऑपरेशन में शिवसेना (उबाठा) को ‘समपार्श्विक नुकसान’ उठाना पड़ा है।
इससे पहले दिन में, आदित्य के करीबी सहयोगी अहीर ने सत्ताधारी शिवसेना की ओर से महाराष्ट्र विधान परिषद के उप-सभापति पद के चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करके सबको चौंका दिया।
ठाकरे ने कहा, “अहीर के इस कदम से वर्ली और शिवड़ी जैसे पारंपरिक गढ़ में पार्टी की ताकत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह ‘ऑपरेशन टाइगर’ नहीं, बल्कि ‘ऑपरेशन देवेंद्र फडणवीस’ है। जो लोग इसे जानते हैं, उन्हें पता है।”
अहीर पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कुछ नेता, जिन्हें सब कुछ मिलता है, फिर भी अपने निजी स्वार्थ के लिए पार्टी छोड़ देते हैं।
उन्होंने कहा, “इसमें कुछ भी नया नहीं है। वर्ली और शिवड़ी हमारे गढ़ रहे हैं और आगे भी रहेंगे। इसका मतलब यह नहीं है कि हमें कोई बड़ा झटका लगा है।”
अहीर के फैसले पर सवाल उठाते हुए ठाकरे ने कहा कि पूर्व मंत्री को पार्टी में कई अहम ज़िम्मेदारियां दी गई थीं।
उन्होंने कहा, “वह यह भी नहीं कह सकते कि मैं उनसे नहीं मिला या उनके लिए समय नहीं निकाला, क्योंकि कुछ दिन पहले ही हमने पुणे से साथ यात्रा की थी। वह शिवसेना (उबाठा) के उपनेता हैं, उन्हें एमएलसी बनाया गया था और उनकी बेटी के एनजीओ को वार्ड-स्तरीय समिति में जगह दी गई थी। वह भारतीय कामगार सेना में भी एक पद पर हैं और ‘बेस्ट’ संघ के प्रमुख हैं। उन्हें और क्या चाहिए था? क्या हमने उन्हें कम दिया?”
जब उनसे पूछा गया कि क्या अहीर वर्ली विधानसभा क्षेत्र से उनके खिलाफ चुनाव लड़ सकते हैं, तो ठाकरे ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
ठाकरे ने कहा, “उन्होंने आज सुबह मुझे संदेश भेजा कि वह मेरे खिलाफ चुनाव नहीं लड़ेंगे। लेकिन ये सब कहने की बातें हैं।” उन्होंने आगे कहा कि अहीर के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
भाषा प्रशांत पवनेश
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