धर्मांतरण-विरोधी कानून विशेष कानूनी ढांचा देगा, किसी बेकसूर को नहीं होगी परेशानी: फडणवीस

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धर्मांतरण-विरोधी कानून विशेष कानूनी ढांचा देगा, किसी बेकसूर को नहीं होगी परेशानी: फडणवीस

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  • Publish Date - June 30, 2026 / 03:27 PM IST,
    Updated On - June 30, 2026 / 03:27 PM IST

मुंबई, 30 जून (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को कहा कि विधानसभा से पूर्व में पारित धर्मांतरण विरोधी विधेयक एक खास कानूनी ढांचा देगा। उन्होंने कहा कि जबरन धर्मांतरण के मामलों से असरदार ढंग से निपटने के लिए बीएनएस के मौजूदा प्रावधान नाकाफी हैं।

विधानसभा में एक सवाल पर फडणवीस ने कहा कि इस कानून को लागू करने के लिए केंद्र की मंज़ूरी का इंतज़ार है।

गृह विभाग का कार्यभार संभाल रहे फडणवीस ने कहा, ‘‘राज्य विधानसभा द्वारा पारित धर्मांतरण-विरोधी कानून ज़बरदस्ती धर्म परिवर्तन के मामलों से निपटने के लिए एक खास कानूनी ढांचा प्रदान करेगा, क्योंकि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के मौजूदा प्रावधान ऐसे अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पर्याप्त रूप से विस्तृत नहीं हैं।’’

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) को और सख्त बनाया है, जिसके तहत धर्मांतरण सहित अवैध गतिविधियों के लिए विदेशी धन का दुरुपयोग करने वाली संस्थाओं के लाइसेंस रद्द कर दिए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि मामले की जांच उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

फडणवीस ने विधानसभा को आश्वस्त किया कि पुलिस ऐसी सभी शिकायतों की निष्पक्ष जांच करेगी तथा केवल दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ ही कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा, ‘‘किसी भी बेगुनाह व्यक्ति को फंसाया नहीं जाएगा।’’ उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित कानून से जबरन धर्मांतरण के मामलों से निपटने की राज्य की क्षमता मज़बूत होगी।

महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता विधेयक 2026 में जबरदस्ती, धोखाधड़ी, प्रलोभन या शादी के ज़रिए होने वाले धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए कड़े प्रावधान हैं। विधेयक में प्रावधान है कि शादी के बहाने गैर-कानूनी तरीके से धर्मांतरण कराने वालों को सात साल की जेल और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

भाषा आशीष संतोष

संतोष