नए आयामों के कारण युद्ध अब जटिल हो गए हैं: राजनाथ

नए आयामों के कारण युद्ध अब जटिल हो गए हैं: राजनाथ

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  • Publish Date - January 18, 2026 / 08:15 PM IST,
    Updated On - January 18, 2026 / 08:15 PM IST

नागपुर, 18 जनवरी (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को यहां कहा कि युद्ध बहुत जटिल हो गए हैं और अब ये केवल सीमाओं तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि ऊर्जा, व्यापार, शुल्क, आपूर्ति शृंखला, प्रौद्योगिकी और सूचना भी इसके नए आयामों का हिस्सा हैं।

यहां ‘सोलर इंडस्ट्रीज’ में मध्यम क्षमता वाले गोला-बारूद संयंत्र के उद्घाटन समारोह में एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब रक्षा उत्पादन केवल सार्वजनिक क्षेत्र तक सीमित था और किसी ने भी निजी क्षेत्र की भागीदारी के बारे में नहीं सोचा था।

उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र के पास क्षमता और संभावना तो थी, लेकिन उसकी भागीदारी उस स्तर पर नहीं थी जितनी होनी चाहिए थी।

सिंह ने कहा कि जब देश ‘आत्मनिर्भरता’ की दिशा में कदम बढ़ा रहा था तब निजी क्षेत्र के रक्षा उत्पादन को लेकर चुनौतियां और संदेह थे, लेकिन वर्तमान सरकार ने नीतियों में बदलाव लाकर और प्रक्रियाओं को सरल बनाकर इस क्षेत्र के लिए द्वार खोल दिए, क्योंकि सरकार को निजी क्षेत्र की क्षमता पर पूरा भरोसा था।

उन्होंने कहा, ‘‘इससे गुणवत्ता में सुधार, समयबद्ध कार्य निष्पादन में वृद्धि और उत्पादकता एवं वितरण में भी तेजी आई है। हमारे रक्षा तंत्र में काफी सुधार हुआ है। निजी रक्षा क्षेत्र में वैज्ञानिक सोच और प्रौद्योगिकी आधारित दृष्टिकोण का विकास जिस प्रकार हुआ है वह अत्यंत सराहनीय है।’’

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अनुसंधान एवं विकास के मामले में निजी क्षेत्र अब सार्वजनिक क्षेत्र से आगे निकल चुका है।

सिंह ने कहा कि भारत एक प्रमुख हथियार निर्यातक बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि गोला-बारूद की आपूर्ति में कमी महसूस की गई थी, लेकिन सरकार ने इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता लाई है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल किए गए पिनाका मिसाइलों और नागास्त्र ड्रोन जैसी विभिन्न रक्षा उत्पादन क्षमताओं के लिए सोलर समूह की सराहना की।

सिंह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि भारत गोला-बारूद उत्पादन का वैश्विक केंद्र बने।

उन्होंने कहा, ‘‘युद्ध बहुत जटिल होते जा रहे हैं और उनकी तीव्रता भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में युद्ध की तैयारी युद्धस्तर पर होनी चाहिए। युद्ध का स्वरूप बहुत तेजी से बदल रहा है। नए तरीके सामने आ रहे हैं जो पारंपरिक युद्ध में कभी नहीं थे।’’

भाषा

सुरभि सुरेश

सुरेश