राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस मनाया गया
देशभर के मीडिया विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने ‘जनसंपर्क: लोकतंत्र का पांचवा स्तंभ’ विषय पर रखे विचार
रायपुर
पब्लिक रिलेशन्स सोसाइटी ऑफ इंडिया (PRSI), रायपुर चैप्टर ने राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस पर ऑनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की। इसमें जनसंपर्क: लोकतंत्र का पांचवा स्तंभ विषय पर देश के जाने-माने जनसंपर्क विशेषज्ञों, पत्रकारों, संचार विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मीडिया एडवायजरी कमेटी उत्तराखण्ड सरकार के चेयरमैन और आईआईएमसी के पूर्व अधिष्ठाता गोविन्द सिंह ने कहा, अभी जनसंपर्क और जनसंवाद की भूमिका मायने रखती है।
सोशल मीडिया के प्रभाव पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, अन्ना हजारे आंदोलन से लेकर श्रीलंका और बांग्लादेश के घटनाक्रमों में सोशल मीडिया की ताकत समझ आती है, लेकिन यह बेकाबू ज्यादा है। किसी भी शक्ति के साथ नियंत्रण जरूरी है। उन्होंने आगाह किया कि आज पीआर एजेंसियां प्रोपेगेंडा और कॉर्पोरेट लॉबिंग के जरिए सरकारों को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही हैं।
जनसंपर्क: मन से मन को जोड़ने की कला
IBC24 के सह-कार्यकारी संपादक बरुण सखाजी श्रीवास्तव ने कहा जनसंपर्क को ‘बॉटम ऑफ डेमोक्रेसी’ (लोकतंत्र की आधारशिला) कहना ज्यादा सही होगा। यह लोगों के मन तक पहुंच रखने वाला माध्यम है। इसे केवल सूचना प्रसार तक सीमित न रखकर ‘मन से मन को जोड़ने’ की प्रक्रिया माना चाहिए। एमिटी विश्वविद्यालय की प्रोफेसर वीना हाड़ा ने जनसंपर्क के क्षेत्र में बढ़ते ‘पर्सनलिज्म’ (व्यक्तिवाद) और दिखावे पर चिंता व्यक्त की। PRSI वेस्ट जोन के वाइस प्रेसिडेंट एसपी सिंह ने ‘ग्लोबल विलेज’ की अवधारणा पर प्रकाश डाला। PRSI रायपुर चैप्टर के अध्यक्ष प्रोफेसर शाहिद अली, जनसंपर्क विभाग के अतिरिक्त संचालक श्री आलोक देव, संगोष्ठी में प्रोफेसर डॉ अलीम खान, मानवाधिकार आयोग के जनसंपर्क अधिकारी मनीष मिश्रा, चिप्स के जनसंपर्क अधिकारी संजीव शर्मा, सीएसपीडीसीएल के जनसंपर्क अधिकारी विकास शर्मा ने भी अपने विचार रखे। पीआरएसआई के सचिव डॉ कुमार सिंह तोप्पा ने आभार व्यक्त किया।