Chaiti Chhath 2026: आज से चैती छठ महापर्व की शुरुआत! पूजा विधि और खास नियम जानकर ही करें व्रत, वरना नहीं मिलेगा पूरा फल!

Ads

Chaiti Chhath 2026: भगवान सूर्यदेव की आराधना का पावन पर्व चैती छठ आज से शुरू हो गया है। यह चार दिन तक चलने वाला कठिन व्रत है, जिसमें श्रद्धालु सूर्य देव और छठी मैया की पूजा करते हैं। छठ पर्व साल में दो बार, चैत्र और कार्तिक माह में मनाया जाता है।

  •  
  • Publish Date - March 22, 2026 / 10:08 AM IST,
    Updated On - March 22, 2026 / 10:08 AM IST

(Chaiti Chhath 2026/ Image Credit: IBC24 News)

HIGHLIGHTS
  • 22 मार्च से शुरू हुआ चार दिवसीय चैती छठ महापर्व
  • व्रती 36 घंटे का निर्जला व्रत रखते हैं
  • पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन खरना का आयोजन

Chaiti Chhath Vrat ke Niyam: चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष में मनाया जाने वाला चैती छठ महापर्व आज, 22 मार्च 2026 से शुरू हो गया है। यह चार दिवसीय कठिन और पवित्र व्रत मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में बड़े श्रद्धा भाव के साथ मनाया जाता है। व्रती इस दौरान भगवान सूर्य और छठी मैया की पूजा करते हैं और 36 घंटे का निर्जला व्रत रखते हैं। यह पर्व आस्था, अनुशासन और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

चैती छठ व्रत 2026 की तिथि

  • 22 मार्च 2026 पहला दिन: नहाय-खाय
  • 23 मार्च 2026 दूसरा दिन: खरना
  • 24 मार्च 2026 तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य
  • 25 मार्च 2026 चौथा दिन: उषा अर्घ्य और व्रत पारण

खरना व्रत का महत्व

पहले दिन नहाय-खाय से व्रत की शुरुआत होती है, जिसमें व्रती सुबह स्नान करके शुद्ध और सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं और घर की सफाई पर विशेष ध्यान देते हैं। दूसरे दिन यानी खरना पर व्रती पूरे दिन उपवास रखते हैं। शाम को पूजा के बाद गुड़-चावल की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण किया जाता है। इसी दिन से 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है। यह दिन व्रती की तपस्या और भक्ति की तैयारी का प्रतीक माना जाता है।

सूर्य को संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य

तीसरे दिन अस्त होते सूर्य को संध्या अर्घ्य दिया जाता है। चौथे दिन उगते सूर्य को उषा अर्घ्य अर्पित किया जाता है। यह छठ पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। व्रती नदी, तालाब या घाट पर जाकर पूरी विधि-विधान से सूर्य देव और छठी मैया की पूजा करते हैं। इस दौरान व्रती की भक्ति और अनुशासन सर्वोपरि माना जाता है।

छठ पूजा के नियम और महत्व

छठ व्रत में शुद्धता और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। घर में तामसिक भोजन वर्जित होता है और केवल सात्विक भोजन लिया जाता है। व्रती 36 घंटे तक जल ग्रहण नहीं करते। पूजा में पारंपरिक प्रसाद जैसे बांस का सूप, दौरा और ठेकुआ का उपयोग किया जाता है। मान्यता है कि यह व्रत करने से परिवार में सुख-समृद्धि, आरोग्य और संतानों की लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है। चैती छठ महापर्व केवल व्रत नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन और सूर्य ऊर्जा के प्रति श्रद्धा का अद्भुत संगम है।

इन्हें भी पढ़ें:

चैती छठ महापर्व कब शुरू हुआ है?

चैती छठ महापर्व 22 मार्च 2026 से शुरू हो गया है और यह चार दिन तक चलता है।

व्रती कब निर्जला व्रत रखते हैं?

खरना के बाद व्रती 36 घंटे का निर्जला व्रत रखते हैं।

पूजा में कौन-कौन से प्रसाद उपयोग किए जाते हैं?

पूजा में बांस का सूप, दौरा और ठेकुआ जैसे पारंपरिक प्रसाद का उपयोग किया जाता है।

चैती छठ महापर्व का महत्व क्या है?

यह व्रत सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का प्रतीक है। मान्यता है कि इससे परिवार में सुख-समृद्धि, आरोग्य और संतानों की लंबी आयु मिलती है।