Guru Purnima 2026: “गुरु तत्व ही आदि, गुरु तत्व ही अनंत”! जान लें, कल गुरु पूर्णिमा के दिन कौन सी गलतियों से रुष्ट हो सकते हैं देवगुरु और महालक्ष्मी?

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Guru Purnima 2026: कल 29 जुलाई 2026 (बुधवार) आषाढ़ पूर्णिमा यानी गुरु पूर्णिमा 2026 का दिन बेहद पवित्र और खास है। यह दिन सिर्फ हमारे आध्यात्मिक गुरुओं के लिए ही नहीं है, बल्कि माता-पिता, शिक्षकों, मार्गदर्शकों का आभार जताने का एक सुनहरा मौका है। आइये जानते हैं इस दिन कौन से गलतियों को करने से बचना चाहिए..

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  • Publish Date - July 28, 2026 / 06:21 PM IST,
    Updated On - July 28, 2026 / 06:21 PM IST

Guru Purnima 2026/Image Credit: ScreenGrab / AI Generated / @Grok

HIGHLIGHTS
  • गुरु पूर्णिमा पर भूलकर भी न करें ये गलतियाँ!
  • इस छोटी सी भूल और खंडित हो सकता है आध्यात्मिक लाभ!

Guru Purnima 2026: कल 29 जुलाई 2026 (बुधवार) को “गुरु पूर्णिमा” का पावन पर्व है। आषाढ़ मास की इस पूर्णिमा को महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में “व्यास पूर्णिमा” भी कहा जाता है। चूँकि पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई की शाम से शुरू होकर 29 जुलाई की रात्रि तक रहेगी, इसलिए मुख्य पूजा-आराधना कल ही संपन्न होगी। भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) के समान सर्वोपरि माना गया है।
कहा गया है : “गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥”

आभार जताने का सुनहरा अवसर!

हिन्दू धर्म में आषाढ़ पूर्णिमा यानी गुरु पूर्णिमा 2026 का दिन बेहद पवित्र और खास माना जाता है। यह दिन सिर्फ हमारे आध्यात्मिक गुरुओं के लिए ही नहीं है, बल्कि माता-पिता, शिक्षकों, मार्गदर्शकों और हर उस व्यक्ति का आभार जताने का एक सुनहरा मौका है, जिसने हमें जीवन में सही राह दिखाई और ज्ञान दिया।

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शास्त्रों के मुताबिक गुरु पूर्णिमा के पवित्र दिन पर कुछ गलतियों को करने से बचना चाहिए। इन गलतियों के कारण न केवल आपकी पूजा का फल खत्म हो जाता है, बल्कि देवगुरु बृहस्पति और माता लक्ष्मी भी नाराज हो जाते हैं। तो आइए जानते हैं कि इस दिन हमें किन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए:

गुरु या बड़े-बुजुर्गों का अपमान या अनादर न करें!

“इस दिन सबसे बड़ी सावधानी यही रखनी है कि अपने गुरु या बड़े-बुजुर्गों का अपमान न हो और उनके प्रति कटु शब्द न बोले जाएं। गुरु पूर्णिमा पर गुरु से बहस करना या उनके प्रति मन में गलत विचार लाना बेहद अशुभ माना जाता है। इससे गुरु की कृपा रुक जाती है, जीवन भटक सकता है और मन अशांत होता है। इस पावन दिन का पूरा पुण्य भी नष्ट हो जाता है।”

मांस, मदिरा, प्याज-लहसुन या तामसिक भोजन का सेवन न करें!

गुरु पूर्णिमा के पवित्र दिन पर मांस, मदिरा, प्याज-लहसुन और किसी भी तरह के तामसिक भोजन से पूरी तरह दूर रहना चाहिए। यह दिन सादगी और सात्विकता का है। इस दिन तामसिक भोजन करने से माता लक्ष्मी रुष्ठ हो सकती हैं और आपकी पूजा-साधना का कोई फल नहीं मिलता।

देर से उठना, आलस्य या पूजा में लापरवाही!

गुरु पूर्णिमा के दिन आलस्य से बिल्कुल दूर रहना चाहिए। सुबह जल्दी न उठना, पूजा-पाठ में लापरवाही करना या मन में उत्साह न रखना अशुभ माना जाता है। इस दिन घर को पूरी तरह साफ-सुथरा रखें और शाम को रोशनी जरूर करें। पूजा के समय काले कपड़े पहनने से बचें, इसकी जगह हल्के रंग या पीले रंग के कपड़े पहनना बहुत शुभ होता है।

गुरु से मिलने खाली हाथ न जाएँ!

अगर इस दिन गुरु के पास जाना संभव हो, तो कभी भी खाली हाथ न जाएं। अपनी श्रद्धा के अनुसार कुछ फल, मिठाई, वस्त्र या दक्षिणा लेकर जाना सम्मान का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही, अपने मन को बुरे विचारों से दूर रखें और स्वभाव में संयम बनाए रखें। अगर इन बातों का ध्यान नहीं रखा जाए, तो मन में अशांति बढ़ती है।

गुरु पूर्णिमा सिर्फ एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह खुद को पहचानने और दूसरों के प्रति आभार जताने का दिन है। इस दिन गुरु की आराधना करने से कुंडली का बृहस्पति दोष भी दूर होता है और जीवन में ज्ञान का सवेरा आता है।

Disclaimer:- उपरोक्त लेख में उल्लेखित सभी जानकारियाँ प्रचलित मान्यताओं और धर्म ग्रंथों पर आधारित है। IBC24.in लेख में उल्लेखित किसी भी जानकारी की प्रामाणिकता का दावा नहीं करता है। हमारा उद्देश्य केवल सूचना पँहुचाना है।

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यदि हमारे कोई जीवित गुरु न हों, तो हमें गुरु पूर्णिमा के दिन किसकी पूजा करनी चाहिए?

सनातन परंपरा के अनुसार, यदि आपके कोई भौतिक गुरु नहीं हैं, तो आप आदिगुरु भगवान शिव, भगवान श्री कृष्ण या महर्षि वेदव्यास जी को अपना गुरु मानकर उनकी आराधना कर सकते हैं। इसके अलावा अपने माता-पिता और प्रथम शिक्षक का आशीर्वाद लेना भी गुरु पूजा के समान ही फल देता है।

इस दिन पीले रंग के वस्त्र पहनने का क्या महत्व है?

पीला रंग देवगुरु बृहस्पति, भगवान विष्णु और सात्विक ऊर्जा का प्रतीक है। गुरु पूर्णिमा के दिन पीले वस्त्र धारण करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है, मन में सकारात्मक विचार आते हैं और आध्यात्मिक साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है।

क्या गुरु पूर्णिमा के दिन घर में तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित है?

जी हाँ, शास्त्रों के अनुसार पूर्णिमा तिथि के दिन स्वयं तुलसी दल (पत्ते) तोड़ना पूरी तरह वर्जित माना गया है। यदि आपको भगवान विष्णु या व्यास जी की पूजा के लिए तुलसी के पत्तों की आवश्यकता है, तो उन्हें एक दिन पहले (चतुर्दशी तिथि को) ही तोड़कर रख लेना चाहिए।

गुरु पूर्णिमा के दिन किन चीजों का दान करने से बचना चाहिए?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस पावन तिथि पर दूध और चांदी का दान करने से बचना चाहिए। पूर्णिमा के दिन इनका दान करने से कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो सकता है, जिससे मानसिक तनाव और अनिद्रा जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

यदि गुरु से प्रत्यक्ष मिलना संभव न हो, तो दूर रहकर उनकी कृपा कैसे प्राप्त करें?

यदि आप अपने गुरुदेव से दूर हैं, तो एकांत स्थान पर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। मानसिक रूप से गुरुदेव का ध्यान करें, उनके चित्र को प्रणाम करें, उनके दिए मंत्र का जाप करें और उनकी शिक्षाओं को जीवन में उतारने का संकल्प लें। गुरु तत्व सर्वव्यापी है, आपकी श्रद्धा उन तक अवश्य पहुँचेगी।