dev ji surrrender / image source: IBC24
Naxali Dev Ji Kaun Hai: तेलंगाना: नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को बड़ी कामयाबी मिलने की खबर सामने आई है। सूत्रों के अनुसार नक्सल संगठन के मुखिया देव जी ने अपने 16 साथियों के साथ हथियार डालते हुए सुरक्षा बलों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। प्रतिबंधित माओवादी संगठन के शीर्ष नेता देवजी उर्फ थिप्पिरी तिरुपति ने अपने 16 साथियों के साथ तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। कर्रेगुट्टा क्षेत्र में चलाए गए संयुक्त ऑपरेशन “कगार” से संगठन को भारी झटका लगा है और सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि 31 मार्च 2026 से पहले यह अब तक की सबसे बड़ी सफलता है। बताया जा रहा है कि इनामी माओवादी संग्राम ने भी हथियार डाले हैं।
देवजी, जिसका वास्तविक नाम थिप्पिरी तिरुपति है, देश के सबसे खतरनाक और वरिष्ठ माओवादी नेताओं में गिना जाता रहा है। लगभग 60 वर्षीय देवजी मूल रूप से तेलंगाना (पूर्व आंध्र प्रदेश) के करीमनगर जिले का निवासी है और संगठन में महासचिव जैसे सर्वोच्च पद तक पहुंचने वाला तीसरा लगातार तेलुगु नेता माना जाता है। इंटरमीडिएट शिक्षा के दौरान वह रैडिकल स्टूडेंट्स यूनियन से जुड़ा और यहीं से भूमिगत माओवादी गतिविधियों में शामिल हो गया। तेज रणनीतिक सोच और संगठनात्मक कौशल के कारण वह जल्द ही माओवादियों की मिलिट्री इंटेलिजेंस विंग का प्रमुख बना और बाद में सेंट्रल मिलिट्री कमीशन का इंचार्ज तथा पोलित ब्यूरो सदस्य के रूप में शीर्ष नेतृत्व में शामिल हुआ। मई 2025 में बसवराजु के एनकाउंटर के बाद सितंबर 2025 में उसे CPI (माओवादी) का महासचिव नियुक्त किया गया था।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार देवजी उर्फ देवअन्ना, चेतन, संजीव और सुधर्शन जैसे कई नामों से सक्रिय रहा और गोवा, केरल व बंगाल तक माओवादी नेटवर्क विस्तार में उसकी भूमिका बताई जाती है। वह छत्तीसगढ़ के झीरम घाटी कांड सहित कई बड़े एंबुश और आईईडी हमलों की रणनीति से जुड़ा रहा है और इस कारण उसे देश के सबसे खतरनाक माओवादी नेताओं में माना जाता था। विभिन्न राज्यों में उस पर 1 से 2 करोड़ रुपये तक का इनाम घोषित था।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार देवजी कई बड़े नक्सली हमलों की रणनीति में शामिल रहा, जिनमें झीरम घाटी कांड, एंबुश और आईईडी विस्फोटों की श्रृंखला प्रमुख हैं। उस पर विभिन्न राज्यों में कुल 1 से 2 करोड़ रुपये तक का इनाम घोषित था। मई 2025 में शीर्ष माओवादी नेता बसवराजु के मारे जाने के बाद सितंबर 2025 में उसे संगठन का महासचिव बनाया गया था।
छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलियों का बड़ा धड़ा ढह गया है और कुछ बचे उग्रवादी भी अब सक्रिय नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों का अभियान तेज गति से जारी है और सशस्त्र नक्सलवाद अपने अंतिम चरण में है। सरकार ने मुख्यधारा में लौटने का आह्वान करते हुए कहा कि शेष उग्रवादी भी आत्मसमर्पण कर समाज में पुनर्वास का अवसर ले सकते हैं।
बताया जा रहा है कि कर्रेगुट्टा क्षेत्र में चलाए गए संयुक्त ऑपरेशन “कगार” के दबाव से संगठन पूरी तरह बिखर गया, जिसके बाद शीर्ष नेतृत्व ने सरेंडर का रास्ता चुना। सुरक्षाबलों के लगातार अभियान और बढ़ते दबाव के चलते यह कार्रवाई संभव हो सकी है। इस घटनाक्रम को लाल आतंक के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े झटकों में से एक माना जा रहा है, जिससे संगठन को गंभीर क्षति पहुंचने की बात कही जा रही है।
बताया जा रहा है कि 31 मार्च 2026 से पहले नक्सल मोर्चे पर यह सुरक्षा बलों की बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। माना जा रहा है कि शीर्ष नेतृत्व के सरेंडर से क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों पर बड़ा असर पड़ सकता है और आने वाले समय में और भी कैडरों के आत्मसमर्पण की संभावना बढ़ सकती है।