Holika Dahan at Mahakaleshwar Temple: महाकाल के दरबार में सबसे पहले ही क्यों जलती है होलिका? जानिए सदियों पुरानी मान्यता का राज!

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Holika Dahan at Mahakaleshwar Temple: फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन किया जाता है। मान्यता है कि देश में सबसे पहले उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में होलिका जलाई जाती है। आखिर क्यों यहां सबसे पहले होलिका दहन किया जाता है? आइए जानते हैं।

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  • Publish Date - February 27, 2026 / 03:50 PM IST,
    Updated On - February 27, 2026 / 03:55 PM IST

(Holika Dahan at Mahakaleshwar Temple/ Image Credit: IBC24 News Customize)

HIGHLIGHTS
  • होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक
  • देश में सबसे पहले महाकाल के दरबार में होती है होलिका
  • होलिका की राख का उपयोग भस्म आरती में किया जाता है

उज्जैन: Holika Dahan at Mahakaleshwar Temple हर साल चैत्र माह की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा के दिन पूरे देश में होली मनाई जाती है। इसके एक दिन पहले फाल्गुन माह की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस साल फाल्गुन पूर्णिमा 3 मार्च को है, इसलिए इसी दिन होलिका दहन किया जाएगा और अगले दिन 4 मार्च को रंगों की होली खेली जाएगी। इसे छोटी होली भी कहा जाता है।

महाकाल के दरबार में सबसे पहले क्यों होती है होलिका दहन

उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में देश में सबसे पहले होलिका दहन किया जाता है। पुरानी परंपरा के अनुसार, प्रजा सबसे पहले अपने राजा के घर उत्सव मनाती है। इसी कारण महाकाल के दरबार में संध्या आरती और पूजा के बाद मंदिर प्रांगण में होलिका दहन किया जाता है। मान्यता है कि इससे नगर की नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं।

भस्म आरती में राख का उपयोग

महाकाल के दरबार में होलिका दहन सिर्फ लकड़ी और उपलों का जलना नहीं है। यह शिव और शक्ति के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु दूर-दूर से इस पवित्र अग्नि के दर्शन करने आते हैं। होलिका दहन के बाद इस पवित्र अग्नि की राख, जिसे विभूति कहा जाता है, अगले दिन ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली विशेष भस्म आरती में इस्तेमाल की जाती है।

महाकाल के प्रति श्रद्धा और परंपरा

होली और होलिका दहन महाकाल के प्रति श्रद्धा और आस्था का प्रतीक हैं। फाल्गुन पूर्णिमा की संध्या में होलिका दहन से नगर और प्रजा में सुख, समृद्धि और बुराईयों का नाश होता है। महाकाल के दरबार में इस आयोजन का अनुभव भक्तों के लिए आध्यात्मिक आनंद और उत्साह से भरपूर होता है।

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होलिका दहन कब होता है?

हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा को, होलिका दहन किया जाता है। इस साल यह 3 मार्च को है।

देश में सबसे पहले होलिका दहन कहां होता है?

सबसे पहले उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में महाकाल के दरबार में होलिका दहन किया जाता है।

होलिका दहन का धार्मिक महत्व क्या है?

यह बुराई पर अच्छाई की जीत और नकारात्मक शक्तियों के नाश का प्रतीक है।

भस्म आरती में होलिका की राख का क्या उपयोग होता है?

होली की अगली सुबह ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली भस्म आरती में होलिका की राख से महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया जाता है।