Janaki Jayanti 2024: सीता जयंती पर इस मुहूर्त में करें पूजा, बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा

Ads

Janaki Jayanti 2024: फाल्‍गुन मास के कृष्‍ण पक्ष की अष्‍टमी तिथि को सीता जयंती या जानकी जयंती मनाई जाती है।

  •  
  • Publish Date - March 3, 2024 / 04:41 PM IST,
    Updated On - March 3, 2024 / 04:41 PM IST

Janaki Jayanti 2024

नई दिल्ली : Janaki Jayanti 2024: फाल्‍गुन मास के कृष्‍ण पक्ष की अष्‍टमी तिथि को सीता जयंती या जानकी जयंती मनाई जाती है। ऐसी मान्यता की है कि इसी दिन देवी सीता राजा जनक की पुत्री के रूप में प्रकट हुई थी। सीता माता धरती की पुत्री हैं, वे धरती से प्रकट हुई थी। जानकी जयंती के दिन देवी सीता की पूजा करने से कई लाभ होते हैं। इस साल 4 मार्च 2024, सोमवार को जानकी जयंती है।

यह भी पढ़ें : Weather Today: तेज आंधी तो कहीं बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि, किसानों की मेहनत पर फिरा पानी… 

पूजा मुहूर्त

Janaki Jayanti 2024: पंचांग के अनुसार फाल्गुन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 3 मार्च 2024 की सुबह 08.44 से शुरू होगी और 4 मार्च 2024 की सुबह 08.49 तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार 4 मार्च को सीता जयंती मनाई जाती है। जानकी जयंती पर सीता माता की पूजा का मुहूर्त 4 मार्च की सुबह 09.38 से सुबह 11.05 तक शुभ मुहूर्त है।

यह भी पढ़ें : Lok Sabha Chunav 2024 : जबलपुर से बीजेपी ने आशीष दुबे को दिया टिकट, पूर्व मंत्री अजय विश्नोई ने किया कटाक्ष, लगाया ये आरोप 

मां लक्ष्‍मी बरसती है कृपा

देवी सीता माता लक्ष्मी जी का ही अवतार हैं। जानकी जयंती पर सीता जी की पूजा करना मां लक्ष्‍मी की कृपा दिलाता है। जीवन में धन-समृद्धि बढ़ती है।

दान करें सुहाग की चीजें

Janaki Jayanti 2024: साथ ही जानकी जयंती के दिन सुहागिन महिलाएं सुहाग की चीजों का दान करें, इससे शुभ फल मिलता है। ऐसा करने से पति की उम्र लंबी होती है।

यह भी पढ़ें : Surbhi Chandna Wedding Pics: ‘नागिन’ फेम सुरभि चंदना बंधी शादी के बंधन में, बॉयफ्रेंड के साथ जोधपुर में लिए सात फेरे

राजा जनक ने संतान प्राप्ति के लिए किया था यज्ञ

Janaki Jayanti 2024: राजा जनक ने संतान प्राप्ति के लिए यज्ञ किया था और इसके बाद जमीन की खुदाई करने पर उन्‍हें कन्‍या प्राप्‍त हुई। सीता दैवीय कन्‍या हैं, इसका पता उनके पिता जनक को तब चला सीता जी ने बचपन में खेलते-खेलते शिव जी का धनुष उठा लिया था, जो कि बेहद भारी था। इसीलिए राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के स्‍वयंवर में शिव जी के धनुष पर प्रत्‍यंता चढ़ाने की शर्त रखी थी। तब राजा जनक को पता चला की सीता जी दैवीय कन्या है। तब प्रभु राम ने शिव धनुष तोड़ दिया था और फिर राम सीता का विवाह हुआ था।

IBC24 की अन्य बड़ी खबरों के लिए यहां क्लिक करें

Follow the IBC24 News channel on WhatsApp