Pitru Paksha Pitra Dosh Upay: पितृ दोष ने रोक रखी है तरक्की? इन देवताओं की करें पूजा, जल्द दूर होंगी सारी परेशानियां!

Pitru Paksha Pitra Dosh Upay: पितृपक्ष को पूर्वजों को याद करने और उनका सम्मान करने का पवित्र अवसर माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस दौरान श्राद्ध और तर्पण के साथ कुछ विशेष देवी-देवताओं की पूजा करने से पितृ दोष से जुड़ी परेशानियां दूर होती हैं और परिवार में सुख-शांति आती है।

Pitru Paksha Pitra Dosh Upay: पितृ दोष ने रोक रखी है तरक्की? इन देवताओं की करें पूजा, जल्द दूर होंगी सारी परेशानियां!

(Pitru Paksha Pitra Dosh Upay/Image Credit: AI-generated)

Modified Date: September 30, 2026 / 11:14 am IST
Published Date: September 30, 2026 11:14 am IST
HIGHLIGHTS
  • 26 सितंबर से शुरू हुआ पितृपक्ष
  • 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या
  • शिव पूजा का बताया गया विशेष महत्व

Pitru Paksha Pitra Dosh Upay: हिंदू धर्म में पितृपक्ष को पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का विशेष (Pitru Paksha Pitra Dosh Upay) अवधि माना जाता है। इस दौरान लोग पितरों की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन कर्मों से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होने और परिवार में सुख-शांति की कामना की जाती है। साल 2026 में पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू हुआ और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा।

क्या होता है पितृ दोष?

ज्योतिष शास्त्र में पितृ दोष (Pitra Dosh Upay) को कुंडली से जुड़ी एक स्थिति माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सूर्य, राहु, केतु या अन्य ग्रहों की कुछ विशेष स्थिति को पितृ दोष से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इसके कारण परिवार, विवाह, संतान, करियर और आर्थिक मामलों में परेशानियां आ सकती हैं। इसलिए पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण करने को विशेष महत्व दिया जाता है।

भगवान शिव की पूजा करें

पितृपक्ष में भगवान शिव की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता के अनुसार, शिव आराधना से पितरों की शांति (Pitru Paksha Pitra Dosh Upay) की कामना की जा सकती है। इसके लिए सुबह स्नान करके शिवलिंग पर जल अर्पित करें और भगवान शिव का ध्यान करें। ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है।

भगवान विष्णु और सूर्य देव की आराधना

पितृपक्ष के दौरान भगवान विष्णु की पूजा करने की भी परंपरा है। पूजा में तुलसी दल अर्पित किया जाता है और पितरों के लिए तर्पण किया जाता है। वहीं, ज्योतिष में सूर्य को पिता और पूर्वजों का कारक माना जाता है। इसलिए सुबह सूर्योदय के समय तांबे के पात्र से सूर्य देव को जल चढ़ाने की परंपरा है।

गणेश जी की पूजा भी मानी जाती है शुभ

भगवान गणेश को विघ्नहर्ता माना जाता है और हिंदू परंपरा में किसी भी शुभ कार्य से पहले उनकी पूजा की जाती है। पितृपक्ष में भी गणेश जी का स्मरण कर परिवार की बाधाएं (Pitru Paksha Pitra Dosh Upay) दूर होने की प्रार्थना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध और तर्पण के साथ इन देवताओं की पूजा करना पितरों की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

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लेखक के बारे में

मैं 2018 से पत्रकारिता में सक्रिय हूँ। हिंदी साहित्य में मास्टर डिग्री के साथ, मैंने सरकारी विभागों में काम करने का भी अनुभव प्राप्त किया है, जिसमें एक साल के लिए कमिश्नर कार्यालय में कार्य शामिल है। पिछले 7 वर्षों से मैं लगातार एंटरटेनमेंट, टेक्नोलॉजी, बिजनेस और करियर बीट में लेखन और रिपोर्टिंग कर रहा हूँ।