Puri Jagannath Rath Yatra 2026: आज धूमधाम से निकलेगी पुरी की जगन्नाथ रथयात्रा, जानें समय, तीनों रथों की खासियत और इतिहास

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Puri Jagannath Rath Yatra 2026: आज धूमधाम से निकलेगी पुरी की जगन्नाथ रथयात्रा, जानें समय, तीनों रथों की खासियत और इतिहास

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  • Publish Date - July 16, 2026 / 07:30 AM IST,
    Updated On - July 16, 2026 / 07:31 AM IST

Puri Jagannath Rath Yatra 2026: आज धूमधाम से निकलेगी पुरी की जगन्नाथ रथयात्रा, जानें समय, तीनों रथों की खासियत और इतिहास /image: AI Generated

HIGHLIGHTS
  • आज पूरे धार्मिक विधि-विधान और भव्यता के साथ निकलेगी भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा
  • गजपति महाराजा की 'छेरा पहरा' रस्म के बाद शुरू होगी रथयात्रा, लाखों श्रद्धालु बनेंगे साक्षी
  • 1200 साल पुरानी परंपरा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा तीन अलग-अलग भव्य रथों पर देंगे भक्तों को दर्शन

Puri Jagannath Rath Yatra 2026ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा आज पूरे धार्मिक उत्साह और भव्यता के साथ निकलेगी। रथों की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और अब श्रद्धालुओं को बस उस पावन क्षण का इंतजार है, जब भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अपने-अपने रथों पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे।

रथयात्रा से पहले भगवान के अनासर विधान की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसके बाद नयन उत्सव होगा, जिसमें भगवान की विशेष आरती और नजर उतारी जाएगी। इसके पश्चात पुरी के गजपति महाराजा परंपरा के अनुसार सोने की मूंठ वाली झाड़ू से छेरा पहराकी रस्म निभाएंगे। इस अनुष्ठान के बाद ही तीनों देवताओं को उनके रथों पर विराजमान कराया जाएगा और रथयात्रा शुरू होगी।

तीनों रथों की अपनी अलग पहचान

Puri Jagannath Rath Yatra 2026 भगवान जगन्नाथ का रथ नंदीघोष कहलाता है, जो लाल और पीले रंग से सजा होता है। भगवान बलभद्र का रथ तालध्वज लाल और हरे रंग का होता है, जबकि देवी सुभद्रा का रथ दर्पदलन लाल और काले रंग के वस्त्रों से सजाया जाता है। हर रथ पर सुंदर चित्रकारी, नौ पार्श्व देवताओं की प्रतिमाएं और पारंपरिक सजावट की जाती है।

सिंहद्वार के सामने सजते हैं रथ

रथ निर्माण पूरा होने के बाद तीनों रथों को जगन्नाथ मंदिर के पूर्वी द्वार सिंहद्वार के सामने खड़ा किया जाता है। पीढ़ियों से जुड़े कारीगर पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ इन रथों का निर्माण करते हैं। रथयात्रा समाप्त होने के बाद रथों की लकड़ियां श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद स्वरूप उपलब्ध कराई जाती हैं, जबकि पहियों को सुरक्षित रखा जाता है।

नंदीघोष रथ की खासियत

Puri Jagannath Rath Yatra 2026 भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ 832 लकड़ी के टुकड़ों से तैयार होता है। इसकी ऊंचाई करीब 45 फीट, लंबाई 34 फीट और इसमें 16 पहिए होते हैं। रथ पर त्रैलोक्य मोहिनी पताका फहराती है और इसे चार विशेष घोड़े खींचते हैं।

देवी सुभद्रा और बलभद्र के रथ

देवी सुभद्रा का दर्पदलन रथ 593 लकड़ी के टुकड़ों से बनता है। इसमें 12 पहिए होते हैं और इसकी ऊंचाई लगभग 43 फीट होती है। वहीं भगवान बलभद्र का तालध्वज रथ 763 लकड़ी के टुकड़ों से तैयार होता है। इसकी ऊंचाई 44 फीट और इसमें 14 पहिए होते हैं।

1200 साल पुरानी आस्था का महापर्व

Puri Jagannath Rath Yatra 2026 पुरी की रथयात्रा की परंपरा ऐतिहासिक रूप से लगभग 1200 वर्ष पुरानी मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान स्वयं मंदिर से बाहर निकलकर अपने भक्तों के बीच आते हैं। रथ की रस्सी खींचना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ अपनी मौसी माने जाने वाली गुंडिचा देवी के मंदिर तक जाते हैं। यही कारण है कि इस महापर्व को भक्त और भगवान के मिलन का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है।

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पुरी की जगन्नाथ रथयात्रा क्यों निकाली जाती है?

मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ गुंडिचा मंदिर (मौसी घर) की यात्रा पर जाते हैं और भक्तों को दर्शन देते हैं।

भगवान जगन्नाथ के रथ का नाम क्या है?

भगवान जगन्नाथ के रथ का नाम नंदीघोष, भगवान बलभद्र के रथ का तालध्वज और देवी सुभद्रा के रथ का दर्पदलन है।

रथ की रस्सी खींचने का क्या महत्व है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार रथ की रस्सी खींचना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है और इससे भगवान का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पुरी की रथयात्रा कितनी पुरानी है?

पुरी की जगन्नाथ रथयात्रा की परंपरा लगभग 1200 वर्ष पुरानी मानी जाती है।

रथयात्रा के बाद रथों का क्या किया जाता है?

रथों की लकड़ियां श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप दी जाती हैं, जबकि रथों के पहियों को सुरक्षित रखा जाता है।

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